International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 4, Issue 4 (2018)

जल प्रबन्धन में जल संवर्धन कार्यक्रम का प्रभाव एवं विकास (मेंहदवानी विकासखण्ड, डिण्डौरी जिले के सन्दर्भं में)


प्रसन्न वदन मरकाम, डाॅ. भूवनेश्वर टेम्भरे

आज हम बिना सोचे-समझे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते जा रहे हैं। हम यह नहीं सोच रहे हैं कि उनका भण्डार सीमित है। अगर हम जल को देखें तो उसका उपयोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है। विश्व की लगभग साँत अरब जनसंख्या उपयोग करने योग्य कुल जल में से वर्तमान में 54 प्रतिशत का उपयोग कर रही है। प्रति व्यक्ति जल की खपत अगर भविष्य में भी ऐसी ही बनी रही तो आगामी 20 वर्षों में सम्पूर्ण विश्व के सम्मुख भयानक जल संकट उत्पन्न होने ही सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता है। ऐसे में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल की खपत पर नियंत्रण और जल प्रबंधन की उचित नीति का होना अति आवश्यक है। जल ही जीवन है, जल को जीवन की संज्ञा दी गई है क्योंकि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जन्तु एवं वनस्पत्ति का जीवन जल पर ही निर्भर है। जल का कोई विकल्प नहीं है। यह हमें प्रकृति से प्राप्त निःशुल्क उपहार है जिसका कोई मोल नहीं है। जल का उपयोग केवल जीव-जन्तु एवं वनस्पत्ति के लिए ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में जैसे वस्तुओं के उत्पादन हेतु उद्योगों में, विघुत उत्पादन में, भवन निर्माण में, सिंचाई के क्षेत्रों में, मानव द्वारा दैनिक कार्यक्रम में प्रमुखता से जिसका उपयोग विशेष तकनीक के बिना सम्भव ही नहीं है।
Download  |  Pages : 78-82
How to cite this article:
प्रसन्न वदन मरकाम, डाॅ. भूवनेश्वर टेम्भरे. जल प्रबन्धन में जल संवर्धन कार्यक्रम का प्रभाव एवं विकास (मेंहदवानी विकासखण्ड, डिण्डौरी जिले के सन्दर्भं में). International Journal of Hindi Research, Volume 4, Issue 4, 2018, Pages 78-82
International Journal of Hindi Research