International Journal of Hindi Research

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Vol. 5, Issue 3 (2019)

मध्यकालीन संत साहित्य में प्रेमदर्शन का अध्ययन


सरिता देवी

जीवन में प्रेम की व्यापक महत्ता होने के कारण साहित्य में इसका सर्वाधिक महत्व है। ’एकोअहम् बहु स्याम’ में भी इसी महत्ता का अन्तर्भाव है एवं सृष्टि का प्रसार इसी अन्तः प्रेरणा द्वारा होता है। यह प्राकृतिक और सहज स्वाभाविक प्रेरणा आरम्भ में सामाजिक बन्धन को स्वीकार नहीं कर पाती किन्तु मनुष्य की वासनाएँ सामाजिक प्रतिबन्ध में ही प्रतिफल होती है। प्रकृति की सहज अन्तःप्रेरणा और समाज के परम्परागत बन्धन में ही प्रेम का प्रतिफलन होगा।
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सरिता देवी. मध्यकालीन संत साहित्य में प्रेमदर्शन का अध्ययन. International Journal of Hindi Research, Volume 5, Issue 3, 2019, Pages 17-19
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