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VOL. 5, ISSUE 6 (2019)
‘फीजीहिंदी’ साहित्यएवंसाहित्यकार: एकपरिदृश्य
Authors
Subashni Shareen Lata
Abstract
फीजी के प्रवासी भारतीय मानक हिंदी की तुलना में, ‘फीजी हिंदी’ भाषा में अपनी भाव-व्यंजनाओं को अच्छी तरह से अभिव्यक्त कर पाते हैं। इसीलिए भारतवंशी साहित्यकारों ने अंग्रेजी भाषा के मोह को छोड़कर हिंदी में साहित्यिक कृतियाँ लिखनी प्रारंभ कीं। जै. एफ सीगल (1977) के अनुसार फीजी हिंदी को बहुत से लोग मिश्रित भाषा कहते हैं, उसे टूटी- फूटी तथा अपभ्रंश भी कहते हैं किंतु यह अशुद्ध हिंदी न होकर भारत में बोली जाने वाली हिंदी की एक जीवंत बोली है जिसका अपना विशिष्ट व्याकरण है तथा फीजी के परिवेश के अनुकूल शब्द भंडार है। फीजी हिंदीपर कई विद्वानों ने महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे हैं जिनमें रेमंड पिल्लई का ‘अधूरा सपना’ और सुब्रमनी का ‘डउका पुराण’ तथा ‘फीजी माँ’प्रमुख हैं।
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Pages:15-17
How to cite this article:
Subashni Shareen Lata "‘फीजीहिंदी’ साहित्यएवंसाहित्यकार: एकपरिदृश्य". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 6, 2019, Pages 15-17
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