International Journal of Hindi Research

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Vol. 6, Issue 4 (2020)

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी): समीक्षात्मक विश्लेषण


सुभाष भिमराव दोंदे

गरीबी उन्मूलन, सामाजिक एवं आर्थिक समावेशन और पर्यावरण की रक्षा को अधिक कारगर बनाने हेतु 17 मुख्य लक्ष्यों और 169 उप-लक्ष्यों (टार्गेट्स) के साथ 2016 से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) ने सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) की जगह ली। "कोई पीछे न छूटे" इस सिद्धांत पर सभी लक्ष्यों को पांच स्तंभ- जैसे लोग, समृद्धि, ग्रह, शांति और साझेदारी के इर्दगिर्द बुना गया है। इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की असंगतता, परस्पर विरोधाभास और इनके निर्धारण पश्चात निगरानी करने और मापने की समस्त अंतर्निहित कठिनाइयां की आलोचना हुयी है। लक्ष्यों, उप-लक्ष्यों का हद से ज्यादा होना और एक साथ होना ऐसी स्थितियों में प्राधान्यता किन लक्ष्यों को मिलनी चाहिए? इसके बारें में सुस्पष्ट नीति नही है। एसडीजी यह अनिवार्य संधि (ट्रीटी) नही होकर मानो आदर्शवादी आकांक्षाओं एक स्वैच्छिक समझौता है। भारत के परिप्रेक्ष्य में हाल ही में एसडीजी सूचकांक में भारत को 60 अंकों का समग्र स्कोर मिला है। वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 102 वें स्थान पर है। किन्तु स्वच्छ जल और स्वच्छता से संबंधित लक्ष्य 6 में भारत का समग्र स्कोर 88 है। विश्व मे हर छटा आदमी भरतीय है इसलिए आने वाले दशक में भारत को एसडीजी के संदर्भ मे कड़ी मशक्कत करनी होगी। समावेशन और एकीकरण द्वारा सतत विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं का संतुलित समाधान ढूँढते हुये समस्त 17 लक्ष्यों के सूचकांक का स्कोर बढ़ाना होगा। प्रस्तुत अनुसन्धान लेख में एसडीजी के समस्त पहलुओं का समीक्षणात्मक विश्लेषण किया गया है।
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How to cite this article:
सुभाष भिमराव दोंदे. सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी): समीक्षात्मक विश्लेषण. International Journal of Hindi Research, Volume 6, Issue 4, 2020, Pages 15-19
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