International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 7, Issue 1 (2021)

बाबा फरीद की वाणी में प्रेम-स्वरूप


गौरव वर्मा

पंजाबी और हिंदी सूफी काव्य में हमें एक ऐसा काव्य कालखंड मिलता है, जहां प्रेम को ईश्वर प्राप्त करने का साधन मानकर कवि सूफी रहस्यवाद का उदघाटन अपने काव्य में करते दिखाई पड़ते हैं । अरब से चलते आ रहे इस्लाम से प्रभावित सूफ़ीवद ने जब भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश किया तब उससे प्रभावित काव्य को सूफी प्रेमाख्यानक काव्य की संज्ञा प्राप्त हुई । सम्पूर्ण भारत और पंजाब के पहले सूफी संत कवि के रूप में हमें बाबा फरीद मिलते हैं । बाबा फरीद ने श्लोक में अपने रहस्यवादी काव्य को प्रस्तुत किया है । बाबा फरीद के काव्य में प्रेम का सच्चा और उत्कृष्ट रूप हमें देखने को मिलता है । बाबा फरीद का यह प्रेम इश्क हकीकी वाला ईश्वरीय प्रेम है । यह प्रेम अत्यंत सच्चा और सरल मार्ग है जिससे ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रेम में परमात्मा को प्राप्त करने की तड़प है और उसे प्राप्त करने योग्य बनने का उपदेश है । लौकिक प्रेम से अलौकिक सत्ता के प्रेम को प्राप्त करना इसकी संपूर्णता है ।
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गौरव वर्मा. बाबा फरीद की वाणी में प्रेम-स्वरूप. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 1, 2021, Pages 62-64
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