International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
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Vol. 7, Issue 1 (2021)

डाॅ. महेन्द्र शर्मा ‘सूर्य’ के उपन्यासों में राष्ट्रीय चेतना


डाॅ. जोगेश

हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार डाॅ. महेन्द्र शर्मा ‘सूर्य’ ने गद्य एवं पद्य दोनों साहित्यिक विधाओं में अपनी लेखनी चलाई है। इनके लेखन में बहुधा उपन्यास, कहानियाँ, संस्मरण, निबन्ध, नाटक, सन्दर्भ, पुस्तकें एवं काव्य-गीत-गज़ल संग्रह, सतसई (दोहा-छन्द), खण्ड, काव्य प्रमुखतः हैं। मूलतः इनके उपन्यास एवं कथा-संग्रह देशभक्ति और भारतीय संस्कृति की भावना से ओत-प्रोत होते हैं। काव्य और गीत-संग्रहों में भी राष्ट्रीय-चेतना भावों का सागर उमड़ता हुआ दिखलाई पड़ता है। ये स्वयं भी देश-प्रेमी और स्वदेश संस्कृति के प्रति निष्ठावान होने के कारण अपनी बहुमूल्य-अभिव्यक्ति को बड़ी सहजता एवं सूक्ष्मता से प्रस्तुत कर जाते हैं। देश भर में व्याप्त सभी ज्वलन्त समस्याओं के प्रति संघर्ष चेतना-भाव, उनका समुचित समाधान, साहसपूर्ण जूझने का भाव और राष्ट्रीयता की भावना इनके द्वारा रचित साहित्य में प्रचुर मात्रा में होती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ भी ये खुलकर अपनी लेखनी चलाते हैं। जातिवाद और पूँजीवाद के विरुद्ध लेखनी चलाकर इन्होंने राष्ट्रीयता को ही सर्वोपरी दर्शाया है। भ्रष्ट राजनेताओं के विरुद्ध भी संघर्ष करने की भावना को अपने लेखन में अभिव्यक्त किया है। निष्कर्षतः सत्य है कि डाॅ. महेन्द्र शर्मा ‘सूर्य’ द्वारा रचित साहित्य में राष्ट्रीय भावना और भारतीय संस्कृति-भावों का भरपूर लेखा-जोखा देखने को मिलता है।
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How to cite this article:
डाॅ. जोगेश. डाॅ. महेन्द्र शर्मा ‘सूर्य’ के उपन्यासों में राष्ट्रीय चेतना. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 1, 2021, Pages 65-67
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