International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 7, Issue 1 (2021)

कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘तीन पहाड़’ में आधुनिक मानव का मनोविश्लेषणवादी चित्रण


विष्णुप्रिया भुक्ता

कृष्णा सोबती एक प्रमुख महिला कथाकार के रूप में जानी जाती हैं । वे अपनी संयमित अभिव्यक्ति और सुथरी रचनात्मकता के लिए प्रख्यात हैं। कृष्णा सोबती ने अपनी लम्बी साहित्यिक यात्रा में हर नई कृति के साथ अपनी क्षमताओं का अतिक्रमण किया है । उनकी उपन्यास ' तीन पहाड़ ' एक प्रेम कथा पर आधारित है जिसके केंद्र में है प्रेम वंचिता जया । यह उपन्यास प्रेम प्रसंगों के ताने-बाने में बुना प्रेम संबंधों की सफलता और असफलता प्रस्तुत करता है । ' तीन पहाड़ ' की कथावस्तु श्री-जया का असफल प्रेम, श्री-एड़ना का प्रेम विवाह, तपन-पुतुल का प्रेम प्रसंग तथा तपन- जया की कुछ समय के प्रेमाकर्षण की घटनाओं पर आधारित है । इस उपन्यास के पात्र प्रेम और आकर्षण के मध्य झूल रहे हैं तथा परिणाम स्वरूप अंतर्द्वंद का शिकार बन रहे हैं । वस्तुतः यही आज के आधुनिक मानव की करुण कहानी है जिसे वह अपनी बदलती आकांक्षाओं और भावनात्मक दुविधा से लिखता है । इसके पात्र जया आज के आधुनिक नारी का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ एक आदर्श नारी के रूप में भी नजर आती है। इस पुरुषवादी समाज की भोगी मानसिकता का वह डट कर सामना करती है और अपने आत्म सम्मान की रक्षा भी करती है । उसके प्रेम में नैसर्गीकता का दर्शन होता है । वह मरण पर्यंत ऐन्द्रिय मोह का शिकार नहीं होती और अपने चरित्र की पावनता को बनाए रखती है । इस उपन्यास में मूलतः पात्रों का मनोचित्रण किया गया है ।पात्रों की मानसिक धारा का उदघाटन, उसकी अन्तर्धाराओं में एकानिरवति खोजना और स्फुट घटनाओं से पात्रा मानस की संगति बिठाना उपन्यास की एक विशेषता मानी ज सकती है।आज अगणित संघर्षों और दबावों से त्रास्त मानव चेतना पहले जैसी सीधी सादी, निद्र्धन्द्ध नहीं रही है, वह विचित्रा अन्तर्संघर्षों से ग्रस्त, अस्पष्ट और दुरूह हो गई है। इस उपन्यास में मनुष्य क्या करता है यह तथ्य उपन्यासकार के लिए गौण है। उसका ध्यान मुख्य रूप से इस बात पर रहता है कि मनुष्य जो कुछ करता है, वह क्यों और कैसे करता है। इसके पात्र अपनी आंतरिकरिकता, एकानितकता और स्तब्धता के कारण सहज सामान्य दृषिट से निर्बल, निरर्थक (एबनार्मल) प्राणी जान पड़ते हैं, किन्तु वास्तव में अछूती, अदम्य मानवीय चेतना के वाहक और मानव के आन्तरिक यथार्थ के विश्वसनीय साक्षी हैं।
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विष्णुप्रिया भुक्ता. कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘तीन पहाड़’ में आधुनिक मानव का मनोविश्लेषणवादी चित्रण. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 1, 2021, Pages 72-74
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