International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 7, Issue 1 (2021)

बाज़ारीकृत वैश्विक परिदृश्य में समसामायिक हिन्दि कविता की बहुस्वरता


डॉ. मिनी जोर्ज

वैश्वीकरण, उपभोक्तावाद, बाज़ारवाद, आर्थिक साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद की संस्कृति पूँजीवाद की देन है। इससे टकराने केलिए या अपनी अस्मिता को बनाए रखने केलिए आज के कवि बाज़ारवाद के चमकीले प्रलोभनों, पद – प्रतिष्ठा तथा भौतिक सुख – सुविधाओं के चक्रव्यूह से बचते हुए अपनी सृजन धार्मिता और सामाजिक सरकारों को सदैव सुरक्षित बनाए रखते हैं। भूमण्डलीकरण व बाज़ारवाद के खतरे हमारे मानवीय सरोकारों को निर्ममता से कुचलने केलिए तत्पर है तो आज की कविता अपने शालीन व ओजपूर्ण स्वरों में मानवता को बचाने के प्रयत्न में मुस्तैद खडी है।
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डॉ. मिनी जोर्ज. बाज़ारीकृत वैश्विक परिदृश्य में समसामायिक हिन्दि कविता की बहुस्वरता. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 1, 2021, Pages 75-81
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