| 1 | अरुणाचल प्रदेश की निशी जनजाति की लोककथाओं का अध्ययन: एक आवश्यकता |
| 2 | वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लोक साहित्य की प्रासंगिकता Authors: डाॅ शारदा प्रसाद |
| 3 | हिंदी फ़िल्मों के माध्यम से हिंदी का प्रचार - प्रसार |
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| 5 | राजस्थान में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम-1857 Authors: डाॅ. सुमन रानी मक्कड |
| 6 | ‘इन्हीं हथियारों से’: आंचलिकता के तत्वों के परिप्रेक्ष्य में उपन्यास का अनुशीलन Authors: ज्ञानेन्द्र मणि त्रिपाठी |
| 7 | कीर्तन घोषा और सूर-सागर के गोपी-उद्धव संवाद का तुलनात्मक अध्ययन |
| 8 | हिंदी सिनेमा और हाशिए का समाज |
| 9 | बुन्देलखण्ड क्षेत्र में बालिकाओं के शैक्षिक पिछड़ेपन मंे विद्यालयों की भूमिका |
| 10 | कोरपोरेट वैश्वीकरण और किसान आत्महत्याएँ– ‘फाँस’ के संदर्भ में Authors: जसीला ए. के, आनंद टी. ए |
| 11 | लोकगीतों का स्वरूप Authors: डॉ. विश्वनाथ महादू देशमुख |
| 12 | बालिकाओं के शैक्षिक पिछड़ेपन का समाज शास्त्रीय अध्ययन का प्रभाव |
| 13 | 21वीं सदी के रामकथा पर आधारित हिंदी उपन्यासों का समकालीन सन्दर्भ |
| 14 | अकाल में उत्सव उपन्यास में चित्रित किसान त्रासदी |
| 15 | ‘अंधेरे में’ का तनाव और ‘अमन का राग’ : तुलनात्मक अध्ययन |
| 16 | जयशंकर प्रसाद का नाट्य साहित्य |
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| 18 | पटरंगपुर पुराण में आंचलिकता के विविध आयाम Authors: डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव सागर |
| 19 | पारधी जनजाति पर आधुनिकता के प्रभावों का अध्ययन Authors: डाॅ. प्रविण्यलता मारकण्डेय |
| 20 | नासिरा जी की नारी संबन्धी मान्यता एवं उपन्यासों में चित्रित कामकाजी नारी Authors: Dr. Lija Achamma George |
| 21 | वैक्सीन कूटनीति: वैश्विक स्वास्थ्य एवं शांतिसंधि के परिप्रेक्ष्य में… Authors: डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे |
| 22 | कबीर के आदर्श समाज की परिकल्पना |
| 23 | ‘गोदान’ में सामन्ती – महाजनी शोषण के विरुद्ध दलितों के मौन – मुखर विद्रोह का ऐलान |
| 24 | अब्दुल बिस्मिल्लाह के ‘जहरबाद’ में व्यवस्था और पुरुष सत्ता का शोषण |
| 25 | भारतीय रेलवे एवं हिन्दी भाषा Authors: डाॅ. श्वेता तिवारी |
| 26 | विश्व की प्राचीनतम जीवंत भारतीय संस्कृति: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के गद्य के आलोक में |
| 27 | सांख्य एवं योग में बंध एवं मोक्ष की अवधारणा Authors: हर्षवर्धन गोस्वामी |
| 28 | वर्तमान भारतीय संगीत में नवाचार |