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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
रामायण में प्रक्षिप्त की प्रामाणिकता
Authors
डॉ. आर्य कुमार हर्षवर्धन
Abstract
रामायण में प्रक्षिप्त की प्रमाणिकता लेकर विद्वानों में मतभेद है परंतु प्रमाणिकता के आधार पर विश्लेषण करने पर पता चलता है कि दीर्घ काल खंड की अवधि पर रामायण में बहुत सारे प्रक्षिप्तांशों को जोडा गया है। वाल्मिकीय रामायण की कुल सर्ग संख्या 645 से बालकांड के चतुर्थ सर्ग में वर्णित श्लोक के अनुसार कुल सर्ग संख्या पांच सौ सर्ग वियोग कर देने से जो 145 सर्ग बच जाता है उसे अगर हम प्रक्षिप्त की संज्ञा देंगे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। इस 145 सर्ग को ही चिह्नित करने का प्रयास इस आलेख का मुख्य उद्देश्य है।
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Pages:12-14
How to cite this article:
डॉ. आर्य कुमार हर्षवर्धन "रामायण में प्रक्षिप्त की प्रामाणिकता ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 12-14
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