International Journal of Hindi Research

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Vol. 7, Issue 5 (2021)

गजानन माधव मुक्तिबोध के साहित्य में चित्रित सामाजिक सरोकार


डॉ. ममता गंगवार

श्री गजानन माधव मुक्तिबोध के व्यक्तित्व में निहित निडरता अपने सिद्धांतों के प्रति एकनिष्ठ तत्परता दृढ़ व स्वाभिमानी स्वभाव के कारण ही उन्हें हिंदी साहित्य जगत में संघर्ष करना पड़ा| उनकी जिज्ञासा कृति उन्हें बौद्धिक हलचलों के प्रखर वातावरण में खींच ले गई| राष्ट्र में व्याप्त अव्यवस्था एवं विसंगतियों से वे बेचैन थे| विद्रोही व्यक्तित्व वाले गजानन माधव मुक्तिबोध को जाति, कुल और सामाजिक वैषम्यों के अवरोधों के कारण माता-पिता व सम्बन्धियों के घोर विरोध का सामना करना पड़ा| उपेक्षितों और दलितों के लिए उनकी सहानुभूति तेजी से बढ़ी और उन्होंने वर्ग चेतना को छिटक दिया| पारिवारिक संस्कार युगीन परिस्थितियां नैतिक मूल्य क्रमश: व्यक्तित्व को संवारते सजाते हैं| मुक्ति-बोध का जीवन अत्यंत निष्कपट, निश्छल एवं सुगम था किंतु उनका व्यक्तित्व उनकी रचनाओं की तरह बहुआयामी था| साहित्यकार का व्यक्तित्व अंततोगत्वा उसकी रचनाओं से संयुक्त होता है उसकी अपनी जिंदगी तंग गलियों के चक्कर काटती हुई अस्तित्व संघर्ष के प्रयासों में भले समाप्त हो जाए किंतु वहां कि सृजनशीलता अनिवार्य रूप से बरकरार रहती है| हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक जीवन, राजनीतिक क्षितिज सभी में एक गहरी उथल-पुथल व्याप्त है जीवन के मानवीय मूल्य तेजी से बदल रहे हैं और उन्हीं के अनुरूप हमारा साहित्य भी नए-नए रूपों में आ रहा है| मुक्तिबोध ने अपने साहित्य में समाज के सभी पक्षों को चित्रित किया है जो उनके सामाजिक सरोकार को उदघाटित करते हैं|
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How to cite this article:
डॉ. ममता गंगवार. गजानन माधव मुक्तिबोध के साहित्य में चित्रित सामाजिक सरोकार. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 5, 2021, Pages 23-27
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