International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 7, Issue 5 (2021)

रामधारी सिंह दिवाकर और ग्रामीण संस्कृति


निषा देवी

प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति जगत् में वंदनीय रही है। उसमें विविधता और अनेकता होते हुए भी एकता पाई जाती है। ग्रामीण संस्कृति का मार्धुय सम्बन्ध सामाजिक पहचान को निरंतर बनाये रखता है। गांव में तीज, त्यौहार, पर्व आदि से मनुष्य में रागात्मक लगाव की निर्मिति होती है। गांव को ही एकता का सूत्र माना जाता है। रामधारी सिंह दिवाकर की पहचान ऐसे रचनाकर के रूप में है, जिसके केन्द्र में प्रमुख रूप से गांव रहे हैं। वह संपूर्ण रूप से गांव की संस्कृति से जुड़े हुए हैं। जिसका चित्रण उन्होंने ‘मखान पोखर’ कहानी संग्रह की कहानियों में किया है। प्रस्तुत संग्रह की कहानियों में पात्रों का अपनी संस्कृति तथा गांव के साथ आत्मिक लगाव को दर्षाया गया है। गांव से दूर रहने के कारण भी वह अपने गांव को भूला नही पाए हैं। शहरी सुख सुविधाओं के रहते हुए भी वह हर पल गांव की माटी की सुगन्ध, वहां के पर्यावरण को अपने समीप ही महसूस करते हैं। आधुनिक समय में व्यक्ति अपने गांव से भले ही दूर हुआ है। परन्तु कहीं न कहीं वह अभी भी गांव से जुड़ा हुआ है। वह गांव के रीति रिवाजों, वहां की परम्परा को भुला कर आगे नहंी बढ़ पाता है। शहरी चकाचैंध में वह गांव जैसे जीवन को नहीं जी पाते हैं। इसी कारण वह वापिस गांव में आने के लिए व्याकुल है।
Download  |  Pages : 66-67
How to cite this article:
निषा देवी. रामधारी सिंह दिवाकर और ग्रामीण संस्कृति. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 5, 2021, Pages 66-67
International Journal of Hindi Research