International Journal of Hindi Research


ISSN: 2455-2232

Vol. 4, Issue 1 (2018)

कालजयी साहित्यकार डाॅॅ० रामविलास शर्मा

Author(s): डाॅॅ० दिलीप कुमार झा
Abstract: डाॅॅ० रामविलास शर्मा हिन्दी के महान आलोचक है। हिन्दी की शुक्लोत्तर, आलोचना में उनका स्थान विशिष्ट है। उन्होंने लगभग सौ पुस्तकों की रचना कर हिन्दी साहित्य - भंडार में श्रीवृद्धि की है। आज हिन्दीजगत् में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रेमचंद्र, रामचंद्र शुक्ल, निराला और महावीर प्रसाद द्विवेदी के विषय में डाॅॅ० रामविलास शर्मा के मत प्रतिष्ठित है। डाॅॅ० शर्मा के पहले हिन्दी आलोचना वस्तुतः कविता की ही आलोचना थी। उन्होनें कविताए कथासाहित्य, नाटक और आलोचना इन सबों की आलोचना की है। हिन्दी-आलोचना को उनकी सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने साहित्य में शुक्ल जी के भौतिकवादी दृष्टिकोण को वैज्ञानिक रूप में विकसित कर उसे सामाजिक परिर्वतन के एक सांस्कृतिक अस्त्र के रूप में और अधिक कारगर बना दिया है। प्रस्तुत शोधपत्र में कालजयी साहित्यकार के रूप में डाॅॅ० रामविलास शर्मा के अवदानों पर विचार किया गया है।
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