International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 4, Issue 4 (2018)

हिंदी भाषा का वैश्विक धरातल


Dr. Ranjith M

हिन्दी राष्ट्रभाषा और संपर्क भाषा दोनों रूपों में भारत तथा आस पास के कुछ देशों में व्यवहृत होती रही है । स्वराज्य की प्राप्ति के बाद हिन्दी केवल भारत की राष्ट्रभाषा ही नहीं रह गई,बल्कि संविधान में भारत की राजभाषा के रूप में भी स्वीकृत किया गया|हिन्दी देश की प्रशासनिक न्यायिक, वाणिज्यिक और विधायी क्षेत्र की भाषा के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है हिंदी जोड़ने वाली भाषा है. संवेदनशीलता की भाषा है. संवेदना हृदय का आभूषण है. इससे समाज को सुसज्जित होना चाहिए. संवेदना के अभाव में साहित्य का सृजन असंभव है
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Dr. Ranjith M. हिंदी भाषा का वैश्विक धरातल. International Journal of Hindi Research, Volume 4, Issue 4, 2018, Pages 53-55
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