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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
अमीर देश के गरीब जनः एक जनवादी नज़रिया
Authors
Manu
Abstract
सब साहित्यकार जनवादी है। मगर सब को हम जनवादी नाम से पुकार नहीं पायेंगे। क्योंकि इंसान के भीतर कई तरह गुण अवगुण मौजूद है। इन गुण अवगुण के मुताबिक मनुष्य में आदत का सृजन होता है। वैसे ही कोई हिंसक बन जाता हैए कोई शोषक बन है। आर्थिक कमी के कारण कई लोग औरों का शिकार बन जाता है। क ही समाज में रहकर किसी को रोटीए कपडाए मकान नहीं मिल जाता है तो कई लोग कई तरह की सुविधाओं के साथ अपनी ज़िन्दगी गुज़ारते है। जनवाद उन शोषित लोगों की हिमायती का आदर्श हैए लगे भूखे किसान व मज़दूरों का चेहरा है। अरुण कमल हिंदी साहित्य के मैदान में उन दुःख दर्द खानेवाले लोगों के साथ हैए इनमें आदिवासी लोग भी शामिल है । इन्हें छोड़कर उनके साहित्य का कोई हैसियत नहीं है। उनकी कविताओं के मरकज़ में आम आदमी खड़ा है। कविताओं के ज़रिये वे इन्हीं लोगों की हक़ केलिए निरंतर लड़ते रहते हैं। अरुण कमल की कविताएं सर्वहारा जन के रोज . रोज भोगे जाते दर्द व उलझनों का उन्हीं की ज़बान में मार्मिक बयान हैं । वे सामाजिक और राजनीतिक उथल.पुथल के बीच भी अपने घर . गांवए खेत . खलिहान ए पेड़ . पौधेए हाट . बाजार ए पशु . पक्षी आदि को नहीं भूलते हैं । उनका पहला काव्य संग्रह ष्अपनी केवल धारष् में उन्होंने आम आदमी की मुश्किलातोंए परेशानियोंए दर्दों को बखूबी साथ बयान किया है।
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Pages:50-53
How to cite this article:
Manu "अमीर देश के गरीब जनः एक जनवादी नज़रिया". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 50-53
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