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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
हिंदी फ़िल्मों के माध्यम से हिंदी का प्रचार - प्रसार
Authors
डॉ शारदा प्रसाद
Abstract
हिंदी फिल्म जगत का जो सफरनामा 3 मई 1913 को आरंभ हुआ था वह आज अपनी सफलता के प्रखर दौर में पहुंच चुका है, किन्तु यह अंतिम सोपान नहीं है। अभी तो इसे अपनी बुलंदियों के चरम तक पहुंचना है । सिनेमा मनोरंजन का तो एक अत्यंत लोकप्रिय और किफायती साधन है तथा इसकी पहुंच सिर्फ भारत के दूर -दराज के इलाकों में ही नहीं अपितु विश्व के सुदूर प्रदेशों तक है। आज पूरे विश्व में इसका बाजार अंगदके पांव के समान जमा चुका है और समृद्धि में नित नए प्रतिमान गढ़े जा रहे हैं। हिंदी सिनेमा ने सिर्फ मनोरंजन को ही नहीं वरन सामाजिक सरोकारों को अपना गंतव्य और मंतव्य बनाया है। सिनेमा दृश्य माध्यम है और इसकी पकड़ आम जनता पर सीधी होती है। अपनी संवाद शैली और अभिनेयता, दृश्यतामकता व विभिन्न मनोरंजक कारकों के कारण दर्शकों पर सीधा प्रभाव छोड़ता है ।यही कारण है किइसकी लोकप्रियता आसंदिग्ध रही है। साहित्य समाज का दर्पण होता है यही सिनेमा में भी चरितार्थ होता है । हिंदी सिनेमा ने अपने 100 वर्षों की यात्रा में भारतीय जीवन की समस्याओं को शिद्दत के साथ उठाता आया है। विश्व भर में हिंदी सिनेमा का बाजार और उसकी लोकप्रियता सबसे अधिक है । हिंदी के प्रचार- प्रसार का जो कार्य सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर के भी नहीं कर पायी वह कार्य सिनेमा ने आसानी से कर दिखाया है। हिंदी के प्रचार - प्रसार में हिंदी सिनेमा ने अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है । हिंदी फिल्मी गीतों की लोकप्रियता आज विश्व भर के लोगों की जुबान पर चढ़ कर बोल रही है ।वह हिंदी जानते हो या नहीं किंतु हिंदी गीत अक्सर गुनगुनाते रहते हैं। हिंदी गीतों के माध्यम से कितने ही हिंदी भाषी रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। थाईलैंड,ऑस्ट्रेलिया, दुबई,अफगानिस्तान, मॉरीशस इत्यादि देशों की यात्रा के दौरान हिंदी की लोकप्रियता देखने को मिली। ‘स्पाइडर मैन’, ‘जुरासिक पार्क’,’ कैसिनो रॉयल’ इत्यादि फिल्मों के अंग्रेजी संस्करण ने जितना मुनाफा नहीं कमाया उतना हिंदी संस्करण ने कमाया । आर्थिक और वाणिज्य- व्यापार की दृष्टि से देखें तो हिंदी सीखना और हिंदी को अपनाना आज उनकी मजबूरी बन गई है । हिंदी सिनेमा के माध्यम से आज हिंदी विश्व भर में लोकप्रिय हो रही है, इसमें कोई संदेह नहीं है। आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो मंदारिन दूसरे स्थान पर हैं और हिंदी तीसरे स्थान पर है,जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाती है।
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Pages:07-11
How to cite this article:
डॉ शारदा प्रसाद "हिंदी फ़िल्मों के माध्यम से हिंदी का प्रचार - प्रसार". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 07-11
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