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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
हिंदी सिनेमा और हाशिए का समाज
Authors
सचिन मदन जाधव
Abstract
फिल्म का केंद्रीय विषय पुराणों मे वर्णित तथा इतिहास में अंकित वर्ण व्यवस्था तथा इस व्यवस्था के अंतिम चरन पर स्थापित शुद्र की इसी वर्ण व्यवस्था के कारण निर्मित पीडा है। हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था की भयावहता फिल्म में दर्शायी है। इस फिल्म में हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था का दंश भुगत रही शुद्र जाति का करूणाजनक चित्रण किया है। ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य वर्णों की बाहयाडंबरता को रेखांकित करते हुए उनके द्वारा शुद्रों का किस प्रकार शोषण किया जाता है इसके प्रतिनिधिक उदाहरण प्रस्तुत किए है। ‘शुद्र-द रायजिंग’ सिनेमा का विकास समस्याएँ, जटिलताएँ और समाधान इन तीन चरणो में दिखाई देता है। फिल्म के प्रथम दृश्य मंे ही शुद्रों को अधनंगी तथा दयनीय अवस्था मंे कमर में झाड व गले मंे हाँडी बांधकर चलते हुए दिखाया है । कुछ ही क्षणो में ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य वर्ण के प्रतिनिधियों की दहशत के दर्शन होते है।
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Pages:27-29
How to cite this article:
सचिन मदन जाधव "हिंदी सिनेमा और हाशिए का समाज ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 27-29
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