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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
अकाल में उत्सव उपन्यास में चित्रित किसान त्रासदी
Authors
गौरव सिंह
Abstract
साहित्य और समाज में अभिन्न संबंध है । समाज यदि शरीर है तो साहित्य को उसकी आत्मा माना जाता है । किसी भी समाज की गतिविधियों की नींव पर ही साहित्य का सृजन होता है । साहित्य समाज की प्रतिध्वनि , प्रतिबिंब है । कोई भी साहित्यकार किसी न किसी समाज से अवश्य जुड़ा होता है, जिसके कारण वह समाज की विभिन्न घटनाओं, स्थितियों को साहित्य के माध्यम से रचने का कार्य करता है । साहित्य के माध्यम से साहित्यकार समाज को दिशा निर्देशन का कार्य भी करता है । आज के समय में भी किसान शब्द सुनते ही एक गरीब , लुटा हुआ सा व्यथित लाचार दीन व्यक्ति का चित्र आंखों के सामने बन जाता है । जिस किसान को सरकारी बैठकों में सब अन्नदाता कहकर महिमामंडित करते हैं दरअसल वह आज सरकारी व्यवस्था की भेंट चढ़कर उपेक्षा का शिकार हो गया है । किसान की बदहाली देश की बदहाली है और इस सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है । इस स्थिति को समझते हुए भी न समझने का समझने ढोंग करती सरकारें भविष्य की भयावह स्थिति की ओर ले जा रहीं हैं । प्राकृतिक आपदायें किसान की शत्रु हैं । फिर भी यदि ऐसी परिस्थिति में प्रशासन किसानों के घावों पर आर्थिक मरहम लगाने के बजाय उनको उनकी ही स्थिति पर छोड़ दे तो इससे ज्यादा भयावह स्थिति किसानों के लिए क्या हो सकती है ? सरकार की नीतियाँ उल्टे किसान के गले का फंदा बन जाएं तो इसे क्या कहा जाएगा ? किसानों की आत्महत्या और उसके मौत के आँकड़े भी स्वाभाविक सी घटना जान पड़े तो हमें समझना चाहिए कि हम और हमारी सरकारें किस कदर किसान के प्रति संवेदनहीनता से गुजर रही हैं ।
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Pages:49-51
How to cite this article:
गौरव सिंह "अकाल में उत्सव उपन्यास में चित्रित किसान त्रासदी ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 49-51
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