ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
पारधी जनजाति पर आधुनिकता के प्रभावों का अध्ययन
Authors
डाॅ. प्रविण्यलता मारकण्डेय
Abstract
आधुनिकीकरण की अवधारणा द्वितीय विश्वयुध्द के बाद प्रचलन में आयी। यह वह समय था जबकि एशियाई, अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों ने औपनिवेशिक दासता से मुक्त होकर विकास मार्ग पर बढ़ना शुरू किया था। इन दोनों से मिलकर एक ऐसा क्षेत्र बना जिसे तीसरी दुनिया के नाम से जाना गया। पश्चिमी विद्धानों ने इन उत्तर औपनिवेशिक देशों में हो रहे सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए तुलनात्मक परिक्षेप्य का प्रयोग किया। इस परिक्षेप्य में पश्चिम को एक सन्दर्भ प्रारूप के रूप में प्रयुक्त किया गया। 18वीं शताब्दी के अंत के आस-पास औद्योगिक क्रांति और पुनर्जागरण की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप पश्चिमी समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था जिस रूप में विकसित हुई उसे ही आधुनिक कहा गया। इसी के सापेक्ष तीसरी दुनिया के देशों को परम्परागत कहा गया। अतः पश्चिमी देशों के प्रभाव के परिणामस्वरूप कम विकसित देशों की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विश्व दृष्टि तथा आर्थिक व्यवस्था में होने वाले सामाजिक संरचना सांस्कृतिक विश्व दृष्टि तथा आर्थिक व्यवस्थाा में होने वाले परिवर्तन को आधुनिकीकरण के रूप में परिभाषित किया जाता है। 18वीं शताब्दी के उत्तराध्र्द में पश्चिम में हुए परिवर्तन की तर्ज पर विकासशील देशों में होने वाले परिवर्तन को आधुनिकीकरण कहा गया। जेसिलशापट और जेमिनशाफ्ट अथवा यांत्रिक एकता और सावयती एकता जैसी ध्रुवीय अवधारणाओं का प्रयोग यूरोपीय समाजों में परिवर्तन के प्रतिमान की व्याख्या के लिए किया गया।
Download
Pages:69-70
How to cite this article:
डाॅ. प्रविण्यलता मारकण्डेय "पारधी जनजाति पर आधुनिकता के प्रभावों का अध्ययन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 69-70
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

