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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
वैक्सीन कूटनीति: वैश्विक स्वास्थ्य एवं शांतिसंधि के परिप्रेक्ष्य में…
Authors
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
सर्वे भवंतु सुखिन: उक्ति के अनुरूप चेचक से लेकर कोविड 19 महामारी तक 'वैक्सीन कूटनीति' के तहत वैश्विक स्वास्थ्य बरकरार रखने के लिए एक राष्ट्र ने अन्य देशों के लिये टीकों के विकास या वितरण में अहम भूमिका निभाई है । रोग प्रतिबंधक टीके (वैक्सीन) मानव जाति की सबसे बड़ी सकारात्मक कृतियों एवं उपलब्धियों में से एक हैं। किन्तु केवल बीमारीयों को खत्म करके वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार लाने तक सीमित न रखकर, टीकाकरण को विश्व के देशों में परस्पर वैमनस्य और आपसी द्वंद्व मिटाकर एवं संघर्ष का सटीक समाधान ढूँढ़कर, शान्ति एवं खुशहाली लाने के लिये सकारात्मक पहल के रूप में देखा जाना चाहिए। टीकों के निर्माण से जुड़े एडवर्ड जेन्नर और लुई पाश्चर जैसे दुनिया के महानतम वैज्ञानिकोंने विज्ञान एवं मानवता को देशों की सीमा एवं राजनैतिक विचारधारा के परे रखने की बात कही थी। 'वैक्सीन राष्ट्रवाद' और 'वैक्सीन कूटनीति' यह दोनों परस्पर विरोधी धारणायें समय के साथ बदलती दिखाई देती है; और इन दोनों में संतुलन बने रहने की नितांत आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन के चलते आने वाले मुश्किल समय में मानवता को कोविड 19 पश्चात निपाह, इबोला, स्वाइन फ्लू और न जाने कितने ज्ञात-अज्ञात झुनॉटिक रोगों का सामना करना पड़ सकता है। इन महामारीयों से निपटने के लिये प्रतिबंधक वैक्सीन के निर्माण एवं वितरण में विकसित देशों की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ नीति बरकरार रहनी चाहिए I प्रस्तुत लेख में वैक्सीन क्या है? और इनका निर्माण कैसे किया जाता है? इस वैज्ञानिक जानकारी के साथ चेचक से लेकर कोविड 19 तक वैक्सीन से जुड़े सभी कूटनीतिक पहलुओं को उजागर करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:75-80
How to cite this article:
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे "वैक्सीन कूटनीति: वैश्विक स्वास्थ्य एवं शांतिसंधि के परिप्रेक्ष्य में… ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 75-80
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