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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
सूचना और प्रौद्योगिकी युग में हिंदी भाषा का वैश्विक स्वरूप
Authors
डॉ मंजु पुरी
Abstract
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उसे अपने भावों व विचारों के विनमय के लिए विभिन्न संकेतो और ध्वनियों के रूप में भाषा की आवश्यकता होती है स इस सन्दर्भ में मानव की आवश्यकता के अनुरूप हिंदी भाषा की बात करें तो हिंदी भारतीय सभ्यता की वाहिका और संस्कृति की रक्षक है स हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो पूरे देश में ज्यादातर लोगों द्वारा बोली व समझी जाती है स इस संदर्भ में महात्मा गांधी का मानना था कि हिंदी के बिना राष्ट्र गूंगा है क्योंकि भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती है स सूचना और प्रौद्योगिकी के युग में हिंदी भाषा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अभिनीत कर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कदमों को मजबूती से आगे बढ़ा रही है स विश्व बाजार के दबाव के कारण व विज्ञान की सूचना से जुडी अनेक जानकारियां हिंदी में पहुँचाने के लिए बड़ी बड़ी कंपनियों को विवश होना पड़ रहा है स ईमेल, ई -कॉमर्स, ई -बुक वेबपोर्टल ने हिंदी को विश्वव्यापी बना दिया है स संसार की बेहतरीन बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट गूगल, याहू, आईबीएम, ओरेकल ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के सपनों को पंख लगा दिए हैं स बदलते राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक वैज्ञानिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय परिवेश के कारण राज भाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार, प्रयोग और उसकी प्रतिष्ठा के लिए सतत प्रयास किये जा रहे हैं स अब राजभाषा हिंदी के उज्जवल भविष्य के प्रति चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है स क्योंकि हिंदी विश्व की अन्य भाषाओं से प्रतिस्पर्धा करने के लिए कटिबद्ध है, वह दिन अब दूर नहीं जब हिंदी विश्व की अन्य भाषाओं की तरह संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा हासिल कर लेगी।
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Pages:107-110
How to cite this article:
डॉ मंजु पुरी "सूचना और प्रौद्योगिकी युग में हिंदी भाषा का वैश्विक स्वरूप ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 107-110
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