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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
कालिन्दी चरण पाणिग्रही के काव्य में प्रणय– चेतना: एक झलक
Authors
चिन्मयी मिश्र
Abstract
(उन्नीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक में ओडिशा में `सबुज साहित्य’ बनने लगा । रेवेंशा कॉलेज में पढनेवाले कई छात्रों की हृदगत भावाभिव्यक्तियॉं ही इस साहित्य का मुख्य उपजीव्य रहा है । यदि इस साहित्य को ‘तारुण्य की पुकार’ हम कहे तो कोई अ‍त्युक्ति नहीं होगी। उन छात्र-कवियों में एक प्रसिद्ध कवि थे कालिंदी चरण पाणिग्राही जिन्होंने प्रेम तथा प्रणय को युवाओ का ‍अघि‍कार बताया। उनके अनुसार प्रेयसी दुनिया की सबसे कीमती सम्पदा है। प्रेम पल भर के लिए किया जा सकता है लेकिन उसका प्रभाव दीर्घस्थायी होता है । मनुष्य की आयु के साथ प्रेम के प्रभाव की अनोखी रिश्ता है। आयु जितनी – जितनी बढती रहती है प्रेम का प्रभाव उतना- उतना जबरदस्त बनता जाता है । सच कहा जाए तो प्रेम ही मुक्ति की साधना है । जो लोग प्रेम को गोपनीय तथा लज्जा का विषय मानते हैं वे भूल करते हैं। इसी प्रेम को पाने के लिए कवि कालिंदी चरण बार – बार जन्म लेने की तमन्ना रखते हैं । जिस संसार को लोग दुखमय मानते है वह संसार प्रणय की वजह से स्वर्ग में तबदील हो सकता है। कालिंदी चरण के काव्य में प्रणय – चेतना के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं : 1. प्रेम लज्जा का विषय नहीं, वह युवाओं का अधिकार है। 2. प्रेम शाश्वत है । 3. प्रेयसी की हँसी में सारे धर्मो का निचोड निहित है । 4. प्रेमी एक दूसरे के परिपुरक तथा मुक्ति के पथप्रदशर्क भी हैं । 5. प्रेम से जीवन और मृत्यु आकर्षणीय बनती है ।)
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Pages:41-47
How to cite this article:
चिन्मयी मिश्र "कालिन्दी चरण पाणिग्रही के काव्य में प्रणय– चेतना: एक झलक ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 41-47
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