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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
अमरकांत एवं मार्कण्डेय: व्यक्तित्व एवं साहित्य
Authors
अमर कुमार चौधरी
Abstract
साहित्य की श्रेष्टता एवं सफलता तभी सिद्ध होती है, जब लेखकीय बोध रचना द्वारा कला के स्तर को प्राप्त कर लेता है । जहाँ जीवन-बोध की नवीनता अपने-आप में परंपरा से हर मायने में असंगत हो । वहाँ तो जीवन-बोध का साहित्य में रूपान्तरण और भी कठिन हो जाता है । एक ओर इस प्रतिक्रिया को पूर्ण होते देर भी लगती है और दूसरी ओर संक्रांतिकालीन अनुभूतियों के साथ ईमानदार रहने में भयंकर यतनाओं से गुजरना पड़ता है । परिणाम यह होता है कि साहित्य निर्मित प्रक्रिया अधूरी रह जाती है और फिर उसी धारा के अंतर्गत रचनात्मकता का नया प्रवाह ऊपर उठने की कोशिश करता है । यह नया प्रवाह पुराने की प्रेरणाओं को लेकर ही आगे बढ़ता है और गलत दिशा में जाने वाले अपने प्रवाह के पिछले हिस्से को सही दिशा देता है । हमें लगता है कि साहित्य की धारा के अंतर्गत सातवें दशक की हिन्दी कथा-साहित्य के रचनात्मक मोड को स्पष्ट करती है । नई कहानी वास्तव में पूर्व से प्रचलित कहानी विधा में एक नया और महत्वपूर्ण मोड था । आजादी के बाद का मोहभंग निराशा और जीवन के यथार्थ अनुभव को नयी कहानी ने सामने लाया । नयी कहानी के कथाकारों ने जो अनुभव निजी जीवन में किया । उसी को अपनी लेखनी के माध्यम से सामने भी लाया ।
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Pages:111-115
How to cite this article:
अमर कुमार चौधरी "अमरकांत एवं मार्कण्डेय: व्यक्तित्व एवं साहित्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 111-115
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