ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
विभाजन का दर्द और मंटो की कहानी ‘गुरमुख सिंह की वसीयत’
Authors
पंकज कुमार सहनी
Abstract
आजादी के सत्तर साल बाद भी बंटवारें के दर्द की कराहें अभी तक महसूस होती है। विभाजन की वह वीभत्स कहानियाँ और उन कहानियों में मानव जाति का संहार निश्चय ही दोनों कौमों के लिए ह्रदय विदारक रहा है। इस दर्द को केवल हिन्दू या मुसलमान किसी एक जमात ने अकेले नहीं सहा था। बल्कि दोनों ने बराबर सहा था। यह दर्द दोनों के हिस्से बराबर आया था। दोनों ने उतनी ही बर्बरता से एक-दूसरे के लहू बहाए थे। यह घटना इकलौती एक ऐसी दर्दनाक और भयानक घटना थी जिसने न केवल दो भाइयों (हिन्दू-मुस्लिम) को अलग-थलग किया था वरन् एक-दूसरे के खून के प्यासे भी बना दिये गये थे। ‘इंसानियत’ और ‘मानवता’ शब्द को शब्दकोश में दफ़न कर दिए गए थे और अपने ही भाइयों की निर्मम हत्या की जा रही थी। राखी बंधवाने योग्य बहनों का सरेआम उनके वालिद के समक्ष बलात्कार किया जा रहा था। प्रतिकार करने पर अब्बुओं के सिर पत्थरों के हवाले कर दिए जाते थे। पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी जाती थी। उनकी संपत्ति को लुटा जा रहा था। हर तरफ बिछी लाशें और उसपर मंडराती चील मानो मानव जाति के अंत का संकेत दे रही थी। विभाजन के दौरान हुए इन मजहबी दंगों ने कितने लोगों की जान ली, कितने मासूमों की इज्जत लुटी इसका सही-सही अनुमान आज तक नहीं लगाया जा सका है। सौम्या गुप्ता अपने एक लेख में इस अनुमान का जिक्र करते हुए कहती है कि, “1947 के विभाजन में 5 लाख से 10 लाख के बीच औरत, मर्द और बच्चे ज़िन्दगी से हाथ धो बैठे, 70 हजार से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और तकरीबन 1 करोड़ 20 लाख लोग अपने घरों को छोड़कर भागे।”1 वास्तव में विभाजन के दौरान हुए उन दंगों में मौत और विस्थापन में हुए बेघरों का सही-सही आकड़ों में अनुमान लगाना सहज कार्य नहीं था। इस विभाजन और दंगों से मिली घाव आज तक सूखे नहीं हैं। समय-समय पर इसकी टिस हमें आज भी बेचैन करती रहती है। विभाजन से मिले इस टीस और दर्द को साहित्यकारों ने लगातार अपने उपन्यासों, अपनी कहानियों आदि के माध्यम से साझा किया तथा इस टीस ने सदा इस बात का एहसास भी कराया कि विभाजन ने हमें ख़तम न होने वाली वेदना प्रदान की है। मंटो की कहानी ‘गुरुमुख सिंह की वसीयत’ विभाजन से मिले इसी दर्द और उसकी टीस को बयाँ करती है|
Download
Pages:11-15
How to cite this article:
पंकज कुमार सहनी "विभाजन का दर्द और मंटो की कहानी ‘गुरमुख सिंह की वसीयत’ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 11-15
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

