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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
दीन दयाल उपाध्याय के आर्थिक विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता
Authors
सन्नी शुक्ला
Abstract
दीन दयाल उपाध्याय का आर्थिक चिंतन आज के समय के लिए अत्यंत उपयोगी, सामयिक तथा महत्त्वता का विषय है। आज के परंपरागत अकादमिक दृष्टि से दीन दयाल उपाध्याय अर्थशास्त्री नहीं थे, इस से भी बढ़कर थे। अर्थ चिंतक होने के साथ ही उनका व्यक्तित्व समाजसेवी भाव से भरा हुआ था। देश और समाज की व्यवहारिक समस्याओं का गहन अध्ययन के उपरांत भारत की वर्तमान स्थिती के हिसाब और व्यावहारिक रूप से अर्थ चिंतन के क्या सूत्र हो सकते हैं, इस संबंध में पंडित दीन दयाल उपाध्याय का बहुत उपयोगी मार्गदर्शन हम सभी को प्राप्त होता है। जब भारत की दो पंचवर्षीय योजना पूरी हो गई तो योजना की संकल्पना, अवश्यकता, दृष्टि और दिशा को लेकर उन्होंने बहुत ही प्रमाणिक सारगर्भित टिप्पणी करने वाली एक पुस्तिका ‘भारतीय अर्थनीति-विकास की एक दिशा‘ लिखी थी। जो कि अर्थ चिंतन के विषय मंे बहुत महत्व रखती है। वे कहा करते थे कि भारत को एडम स्मिथ, मार्शल, माकर््स, केंज की अर्थ चिंतन की जकड़न से बाहर निकल के भारतीय अर्थ चिंतन के बारे में विचार करना चाहिए। साथ ही पंडित जी सामान्य तौर से बोला करते थे कि भारत इतना सनातन, पुरातन और समृद्ध देश रहा है तो इस देश का अपना कोई अर्थ चिंतन, तंत्र, व्यवहार और दृष्टि जरूर रही होगी। आज के समय में उसका भी अध्ययन आवश्यक है। इन दो आयामांे को लेकर दीन दयाल उपाध्याय ने अपने विचार प्रस्तुत किए। किसी भी विषय, सिद्धांत, नई रचना, व्यवस्था के बारे में विचार करते हैं तो विश्व दृष्टि का विचार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम में खंडित, यांत्रिक विश्व दृष्टि के आधार पर सैद्धांतिक रचनाएं गढ़ी गई हैं। वो मनुष्य को सुख नहीं दे सकती और न ही मनुष्य का कल्याण कर सकती हैं। आज वर्तमान समय की भी यही जरूरत है कि समग्र, समन्वयित और एकात्म विश्व दृष्टि के आधार पर आगे बढ़ा जाए। दीन दयाल का यह मानना था कि हमें अपनी पुरानी सनातन परंपरा को बिल्कुल भी न भूलाकर युकानुकूल रचना बनानी है। वर्तमान समय के सवालों का जबाव देने के लिए, उत्पन्न हुई समस्याओं का समाधान करने के लिए हमें आज की परिस्थितियों के अनुसार ही राष्ट्रहित में विचार करना होगा। हमारा अर्थतंत्र किस तरह से राष्ट्र के विकास में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सकता है यह वर्तमान समय में अकादमिक स्तर पर शोध का विषय बन चुका है। पश्चिमी देशों की चकाचौंध का अंधभक्त बनकर अनुसरण करने से बचते हुए अपने देश के जीवन मूल्यों के आधार पर देश की अर्थ रचना को आगे बढ़ाने में पंडित दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन बहुत महत्व रखता है। आर्थिक योजनाओं तथा नीतियों को बनाते समय प्रजातंत्र तथा सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखना भारतीय अर्थतंत्र का उदे्श्य होना चाहिए। दीन दयाल उपाध्याय ने एक समाज अर्थ चिंतक के रूप में बहुत सारगर्भित सूत्रो को हम सभी के समक्ष रखा है जो कि राष्ट्र के विकास तथा समृद्धि में अवश्य ही उपादेय साबित होंगे।
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Pages:49-51
How to cite this article:
सन्नी शुक्ला "दीन दयाल उपाध्याय के आर्थिक विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 49-51
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