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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
अरविंद आडिंग कृत “दि व्हाइट टाइगर” उपन्यास की प्रासंगिकता
Authors
Dr. Beauti Das
Abstract
अरविंद आडिंग कृत “दि व्हाइट टाइगर” एक आधुनिक तथा मुक्त उपन्यास की कोटी के उपन्यास है। प्रस्तुत उपन्यास के मुख्य पात्र बलराम हालवाई को उपन्यासकार ने एक निष्ठावान नौकर, बुद्धिमान, चिंतक, हत्यारा और एक उद्यमी व्यवसायी के रूप मेँ प्रक्षेपण किया है। पूरी उपन्यास की कथा संरचना प्रत्यावर्तन शैली के माध्यम से उपस्थापन किया गया है। अंधेरी गलियों मेँ जीवन व्यतीत करनेवाला बलराम के जीवन संघर्ष की त्रासद स्थिति, उससे उबरने के लिए उसकी निरंतर आंतरिक अंतर्द्वंद्व, गरीबी की कैद से मुक्ति की मार्ग का स्वप्ना और अंतत: अनैतिक कार्य से सफलता की शिखर पर पहुँच जाने की कथा यहाँ वर्णित है। इस उपन्यास मेँ दो किस्म के भारत की कथा वर्णित है; एक अंधेरेपन और दूसरा प्रकाश की। दुर्भाग्य से बलराम भारत के ग्रामीण इलाके की अंधेरी गली मेँ जन्मे एक बालक की कथा है जिसके पिता एक रिक्सा चालक है जो उसकी ग्यारह साल की उम्र होते होते इस संसार से विदा हो जाते है और माता बचपन मेँ ही चल बसती है और उनकी परवरिश का दायित्व दादी के कंधे पर आ जाते है। साधारणत: व्यक्ति जीवन की मुल्य समाज मेँ पले श्रेणी विभाजन के आधार पर ही निर्धारित होती है,इस यथार्थता से वाकिफ बलराम इसीलिए हर पल उसके आखों मेँ अमीर बनने की जुनून छा जाता है और इस “rooster coop” से हमेशा के लिए आजाद होना चाहते है और इस चाहत मेँ ईमानदार बलराम समय के बदलते परिवेश मेँ एक नए बलराम मेँ परिवर्तित हो जाते है। मालिक लोगों का नौकर के प्रति रवैया, जीवनभर की सेवा-भाव का अवांछित प्रताड़ना से क्षुब्द बलराम एक प्रतिशोधी अश्वत्थामा मेँ बदल जाते है। मेरी शोध पत्र का उद्देश्य अरविंद आडिंग कृत “दि व्हाइट टाइगर” उपन्यास की प्रासंगिकता पर विचार करना।
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Pages:101-106
How to cite this article:
Dr. Beauti Das "अरविंद आडिंग कृत “दि व्हाइट टाइगर” उपन्यास की प्रासंगिकता ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 101-106
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