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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
कार्बन डाइऑक्साइड वृध्दि सह-संबंधित वर्षा वृद्धि: प्रसंगोचित अध्ययनों की समीक्षा
Authors
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
ग्रीष्मकालीन मान्सून दक्षिण एशिया में कृषि और उद्योग के लिए अधिकांश पानी की आपूर्ति करता है और 1.4 अरब लोगों की ख़ुशहाली के लिए महत्वपूर्ण है। किंतु जलवायु परिवर्तन का मान्सून चक्र पर प्रतिकूल असर पड़ा है और इसी कारण विश्वभर में बाढ़ एवं जलमग्नता जैसी मौसम की चरम घटनाओं ने पिछले दशक में 2 बिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित किया हैं। मानवीय गतिविधियाँ इन परिवर्तनों को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं यह पुष्टि करने के लिए अब तक किये गए विश्वव्यापी अनुसंधानों ने सीधे तौर पर वातावरण में उत्सर्जित मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता को जिम्मेदार ठहराया है। प्रत्येक महाद्वीप में विभिन्न परिसंचरण, नमी और स्थिरता परिवर्तन, वनस्पतियों के रंध्र प्रवाहकत्त्व और वाष्पोत्सर्जन में गिरावट के कारण उत्पन्न होते हैं। इसलिये 'कम्युनिटी अर्थ सिस्टम मॉडल' के तहत कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि अलग-अलग महाद्वीपों में अलग-अलग होती है और असममिति (asymmetry) या विषमता दिखाती है। इस के दृश्य परिणाम स्वरूप एशियाई और अफ्रीकी उष्णकटिबंधीय जंगलों में मान्सून वर्षा में सापेक्ष वृद्धि और दक्षिण अमेरिका के अमेझॉन जंगलों में सुखे की संभावना है। आनेवाले समय में ग्रीनहाउस गैस- कार्बन डाइऑक्साइड के ऊष्मागतिक प्रभाव में वृद्धि से सह-संबंधित वायुमंडलीय नमी की मात्रा में वृद्धि के परिणामस्वरूप, समग्र रूप से ग्रीष्मकालीन मान्सून की वर्षा और परकोटी की वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होगी। इसके तथ्य जानने के लिये भारत, अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान के शोधकर्ताओं के एक समूह ने बंगाल की खाड़ी के महानदी द्रोणी (basin) से निकाले गए तलछट (sediment) के कोर नमूनों में पूराजलवायु परोक्षी (proxy) का छह-सात साल अध्ययन किया। इन वैज्ञानिकों ने समुद्र तल पर जमे हुए तलछट के परतों में सुरक्षित छिद्रधारी (foraminifera) परोक्षी से मिले सुरागों का उपयोग करके मान्सून गतिविधि का पुनर्निर्माण किया। इस अध्ययन के निष्कर्ष 'संख्यात्मक मॉडल' का समर्थन करते हैं; जो भविष्य में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता में वृद्धि के साथ मान्सून की अनियमितता, तीव्रता, अवधि और बारंबारता में वृद्धि की भविष्यवाणी करते हैं। जलवायु-प्रेरित जल-खतरों से निपटने के लिये पर्याप्त पुर्व-तैयारी या पिछली घटनाओं से सीख लेने जैसे तन्यक (resilient) दृष्टिकोण को अपनाकर बाढ़ एवं जलमग्नता के प्रभावों को कम किया जा सकता है। प्रस्तुत लेख कार्बन डाइऑक्साइड वृद्धि से सह-संबंधित वर्षा वृद्धि का आधुनिकतम अनुसंधान से मिली सूचना के आधार पर समीक्षा करता है।
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Pages:79-84
How to cite this article:
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे "कार्बन डाइऑक्साइड वृध्दि सह-संबंधित वर्षा वृद्धि: प्रसंगोचित अध्ययनों की समीक्षा ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 79-84
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