International Journal of Hindi Research

International Journal of Hindi Research


International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 7, Issue 5 (2021)

रेणु के रिपोर्ताजों में सामाजिक यथार्थ


बिजेन्द्र कुमार यादव

रिपोर्ताज हिन्दी साहित्य की एक आधुनिक, नवीन और प्रभावी विधा है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के द्वारा आरम्भ की गई इस विधा को कथा-शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु ने अधिक यथार्थ-परक और प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। रेणु जी ने अपने रिपोर्ताजों से आम पाठक गण भी जुड़ाव का अनुभव करते हैं। इनके द्वारा प्रयुक्त एक एक शब्द वर्णित परिवेश की प्रकृति के कण-कण से हमारा तादात्म्य स्थापित करा देते हैं। पानी का मटमैला रंग, कुत्ते की भूँक, गाय भैंसों के गले की घंटी, पंछियों की चहचहाहट, पेड़-पौधों की पत्तियों की सरसराहट इत्यादि इनके रिपोर्ताजों में अपनी गाथा स्वयं कह देते हैं। इनके रिपोर्ताज सम्बंधित अंचलों के ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनैतिक परिस्थितियों के प्रतिनिधित्व करते हैं।
Download  |  Pages : 21-22
How to cite this article:
बिजेन्द्र कुमार यादव. रेणु के रिपोर्ताजों में सामाजिक यथार्थ. International Journal of Hindi Research, Volume 7, Issue 5, 2021, Pages 21-22
International Journal of Hindi Research