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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
प्रवासी साहित्यकार के रूप में ‘सुषम बेदी’
Authors
डॉ. ड़ी. मोहिनी
Abstract
प्रवासी साहित्य की रचना कई सालों पहले से हो रही है। प्रवासी साहित्य विदेश के अनेक देशों में रह रहे भारतीय रचते आ रहे हैं। मॉरिशस भारत के सबसे निकट होने के कारण सबसे अधिक रचना वहीं हुई है। अमेरिका इंग्लैंड में भी अनेक साहित्य लिखे गये हैं। प्रवासी साहित्य हिन्दी में एक विशिष्ट स्थान रखता है। हमें एक नवीन समाज और संस्कृत के करीब ले जाता है । सुषम बेदी की रचनाओं का धरातल वही क्षेत्र रहा है जहाँ कि वह निवासी हैं। अमेरिका एक ऐसी जगह है जो सिर्फ बाहरी सुंदरता का दिखावा करता है। श्हवनश् उपन्यास में गुड्डो का चरित्र वैसा ही है। गुड्डो न्यूयॉर्क की कल्पना कर भारत से न्यूयॉर्क आ गई थी। पर उसे वैसा कुछ भी देखने को मिला नहीं जिसकी उसने कल्पना की थी। जिसको जो रास आता है उसे वही अच्छा लगता है। एक व्यक्ति जिस प्रकार अपने देश के रंग में रंग जाता है वही दूसरे देश के परिवेश में खुद को रंगा नहीं पाता। भारतीयों की एक गलत फहमी रही है कि अमेरिका में जीवन यापन बड़े शानो शौकत से होती है। सुषम बेदी ने इसको बड़े रोचक ढंग से दिखाया है। प्रवासी जीवन की विसंगतियों को देखकर हम सोच में पड़ जाते हैं कि क्या यह वही कल्पित जीवन है जिसको पाने के लिए स्वदेश छोड़ विदेश में रहने लगते हैं। अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के घर उनकी रहन-सहन और उनके सार्वजनिक स्थानों का यथार्थ चित्र प्रस्तुत किया है।
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Pages:95-96
How to cite this article:
डॉ. ड़ी. मोहिनी "प्रवासी साहित्यकार के रूप में ‘सुषम बेदी’". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 95-96
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