ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
सांस्कृतिक चेतना के निर्माण में हिंदी पत्रिकाओं और अखण्ड ज्योति की भूमिका
Authors
किरन, नरेन्द्र प्रताप सिंह
Abstract
सांस्कृतिक चेतना मनुष्य जीवन को परिष्कृत, सम्पन्न, उदार और सर्जनशील बनाने का काम करती है। इसका मुख्य कार्य मानव जीवन को अनूपयोगी क्रियाकलापों के धरातल से ऊपर उठाकर चेतना या बोध की उपयोगी भूमिका में प्रतिष्ठित करना है। यह मानव के चेतनामूलक जीवन एवं व्यक्तित्व को सुंदर, समृद्ध और सार्थक बनाती है। व्यक्तित्व के गौरव और उसकी भव्यता का आधार प्रेम, सहयोग, करुणा, दया, सहानुभूति, साहस, निर्भीकता, कर्मण्यता, विनयशीलता, उदारता तथा कर्म एवं वाणी सौन्दर्य आदि गुण सांस्कृतिक चेतना में होते है। हिंदी पत्रिकाओं ने साहित्य के माध्यम में सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करके उसे शिाखर पर आरूढ़ किया है। इन पत्रिकाओं ने अपने कहानियों, लेखों, निबंधों, संस्मरणों और कविताओं में समाहित सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से पाठक वर्ग को अपने ज्ञान की गंगा से सींचा है व परस्पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वैचारिक सामंजस्य एवं बौद्धिक चिंतन के द्वारा मानव को मानव से जोड़ने और मानवीय संवेदनाओं को संरक्षित करने का भी कार्य किया है। सांस्कृतिक चेतना से सम्पन्न इन पत्रिकाओं में आचार-विचार, लोक व्यवहार, मूल्यों, आदर्शों, संवेदनाओं एवं सबंधों में सामंजस्य दिखाई पड़ता है। प्रारंभिक हिंदी पत्रिकाओं में उदन्त मार्तण्ड, बंगदूत, बनारस अखबार, बुद्धि प्रकाश आदि; भारतेन्दु युगीन पत्रिकाओं में कविवचन सुधा, हरिश्चन्द्र मैग्जीन, हिंदी प्रदीप, ब्राह्मण, बालाबोधिनी, आनन्द कादम्बिनी आदि; द्विवेदी युगीन पत्रिकाओं में सरस्वती, समालोचक, देवनागर, इंदु, मर्यादा, प्रभा आदि; गांधी युगीन पत्रिकाओं में हरिजन, माधुरी, सुधा, विशाल भारत, हंस, विश्वभारती आदि तथा स्वातंत्रयोत्तर पत्रिकाओं में कादम्बिनी, नवनीत, सुशमा, नन्दन, पराग, अहा! जिंदगी, पाखी आदि ने कहानी, कविता, निबंध, लेख, संस्मरण एवं विविध स्तंभों के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। अखण्ड ज्योति पत्रिका सन् 1940 से प्रकाशित होना प्रारंभ हुई। यह मूल रूप से धर्म और अध्यात्म को प्रस्तुत करने वाली पत्रिका के रूप मंे जाना जाती है लेकिन यह अपने आरंभ से लेकर वर्तमान तक धर्म और अध्यात्म को प्रस्तुत करने के साथ ही जन-सामान्य में सांस्कृतिक चेतना के निर्माण के महत्वपूर्ण दायित्व का भी वहन कर रही है। प्रस्तुत शाोध पत्र में ‘सांस्कृतिक चेतना के निर्माण में हिंदी पत्रिकाओं और अखण्ड ज्योति की भूमिका’ को प्रस्तुत किया गया है।
Download
Pages:27-31
How to cite this article:
किरन, नरेन्द्र प्रताप सिंह "सांस्कृतिक चेतना के निर्माण में हिंदी पत्रिकाओं और अखण्ड ज्योति की भूमिका". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 27-31
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

