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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
भारतीय पारम्परिक चिकित्साओं का अभिन्न अंग यूनानी चिकित्सा: एक परिचय
Authors
मुहम्मद वसीम अहमद, रीशा अहमद, शुऐब अहमद अंसारी, पवन कुमार सागर, अस्मा सत्तार खान
Abstract
मेरे महान देश भारत के बारे में पूरा विश्व जानता है की हमारी सभ्यता कितनी सुद्रढ़ और प्राचीन है । इसके साथ ही सभी को ज्ञात है की हमारी परम्परा रही है की जो हमारे पास आया उसको अपनाया है। इसी परम्परा के अनुसार यूनानी चिकित्सा के भारत आगमन पर भारतीय संस्कृति ने चिकित्सा की इस प्रणाली को विदेशी होने के उपरांत भी अपने में समाहित किया। यूनानी चिकित्सा पद्धति दुनिया में चिकित्सा की एक पारंपरिक और सबसे प्राचीन प्रचलित प्रणाली है। यूनानी चिकित्सा का आधार हिप्पोक्रेट्स के चार-अख्लात का सिद्धांत है। यह मानव शरीर में चार-अख्लात (ह्युमर्स) की उपस्थिति मानते हैं जोः रक्त (दम), कफ (बलगम), पीला पित्त (सफरा) और काली पित्त (सौदा) हैं। यूनानी चिकित्सा में जीवित मनुष्य के लिए छह कारक आवश्यक हैं। इसमें आमतौर पर उपचार के चार मुख्य तरीकों का उपयोग किया जाता है जैसे इलाज-बिल-तदबीर (रेजिमिनल थेरेपी), इलाज-बिल-गिज़ा (डाइटो थेरेपी), इलाज-बिल-दवा (फार्माको थेरेपी) और इलाज-बिल-यद (सर्जरी)। यूनानी चिकित्सा के अनुसार मानव शरीर में सात मुख्य घटक शामिल हैं। इस पत्र में, लेखकों ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के परिचय, सिद्धांत, निदान, रोग चिकित्साओं, अवधारणाओं और कार्यप्रणाली को शामिल किया है।
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Pages:32-35
How to cite this article:
मुहम्मद वसीम अहमद, रीशा अहमद, शुऐब अहमद अंसारी, पवन कुमार सागर, अस्मा सत्तार खान "भारतीय पारम्परिक चिकित्साओं का अभिन्न अंग यूनानी चिकित्सा: एक परिचय". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 32-35
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