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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
समकालीन हिन्दी उपन्यासों में कृषक जीवन
Authors
कुमारी आरती
Abstract
भारतीय सन्दर्भ में कृषक जीवन एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। कृषि को केवल एक कर्म न मानकर ‘संस्कार’ मानने के पीछे मुख्य कारण यह है कि कृषि ने मनुष्य को दुरुहता उससे संघर्ष, प्राकृतिक विन्यास उसके उचित उपयोग और दोहन से अवगत कराया। कृषि ने मनुष्य को प्रकृति से उसके वास्तविक अर्थों में परिचित कराया। मनुष्य में प्रकृति के प्रति तरलता और ममत्व का भाव उत्पन्न हुआ। 1990 के बाद कृषि नीतियों से उदारवादी आर्थिक सुधारों का कार्यक्रम भारत में शुरू हुआ, प्रतिव्यक्ति खाद्यान्न उपलब्धता कम होने लगी थी वह लगातार कम होती गई। 2002 और 2003 में हालात ये हो गये कि खाद्यान्न उपलब्धता दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान पड़े बंगाल के भयंकर अकाल के वर्षों से भी कम हो गई।
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Pages:6-7
How to cite this article:
कुमारी आरती "समकालीन हिन्दी उपन्यासों में कृषक जीवन". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 6-7
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