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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
हिन्दी भाषा पर तुर्की छात्रों का भाषाई दृष्टिकोण
Authors
ओज़ान जेम आयदन
Abstract
स्पष्ट है कि हिंदी एक बड़े क्षेत्रफल में बोली जाने वाली भाषा है, न केवल भारत में बल्कि अनेक देशों में भी। साथ ही हिंदी शिक्षा भी विदेश में व्यापक है। जर्मनी, कनाडा, इंग्लैंड जैसे देशों में हिंदी शिक्षा उपलब्ध है और इन देशों में से एक तो तुर्की भी है जहाँ संस्कृत से लेकर वेदों तक पढ़ाया जाता है। १९३५ से लेकर आज तक तुर्की के अंकारा विश्वविद्यालय में संस्कृत, हिंदी (१९९० से), भारत का इतिहास, हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म आदि विषयों का अध्ध्यन इंडोलॉजी विभाग में उपलब्ध है। जब तुर्की भाषी लोग हिंदी या कोई भी हिंदी जैसी भारतीय भाषा सीखते हैं तो उन्हें सीखते समय क्या कठिनाई या आसानी मेहसूस होती है? वे सीखना कहाँ से शुरू करते हैं और किस सामग्री का प्रयोग करते हैं? हिंदी जब विदेशी भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है तो पाठ्यक्रम में क्या रहता है और किस क्रम में पढ़ाया जाता है? सीखने में कितना समय लगता है? इनके अतिरिक्त क्या तुर्की भाषी लोग हिंदी समझते भी हैं? हिंदी पढ़ने वाले तुर्की छात्रों की मातृभाषा तुर्की होने की बात हिंदी सीखने में किन पहलुओं से प्रयोजनमूलक है तथा किन परिस्थितिओं में जटिल लगती है? इन तमाम मुद्दों में एक भाषाई दृष्टिकोण के माध्यम से पाँच चरणों में स्पष्टता लाना इस शोध कार्य का उद्देश्य रहा है।
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Pages:27-30
How to cite this article:
ओज़ान जेम आयदन "हिन्दी भाषा पर तुर्की छात्रों का भाषाई दृष्टिकोण". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 27-30
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