ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
बुंदेली कवि ‘ईसुरी’ के काव्य में लोक-जीवन के तत्त्व
Authors
डॉ. मनोज कुमार
Abstract
ईसुरी ‘जीवनोत्सव’ के कवि हैं। उनकी रचनाओं में देहानुराग के गाढ़े रंग हैं। यूँ तो इनकी शब्द-वाटिका में भक्ति-नीति के भी फूल यत्र-तत्र खिले हैं, लेकिन प्रेम-प्रीति का सतरंगी इन्द्रधनुष जब इनके साहित्याकाश में उदित होता है, तो अद्भुत छटा बनती है। उनके प्रेम का आलम्बन ‘रजऊ’ है। वह बार-बार अपनी कविताओं में उसे टेरते (बुलाते) हैं। घनानंद की सुजान की तरह ‘रजऊ’ ईसुरी की चेतना का हिस्सा है। कविता में वह बार-बार उपस्थित होती है। कुछ लोग उसे वास्तविक मानते हैं, तो कुछ लोग उसे ईसुरी की कल्पना-कृति। जो भी हो लेकिन उसकी उपस्थिति बढ़ी सशक्त और सम्मोहक है। वह ईसुरी की कविताओं की आत्मा है।
Download
Pages:31-36
How to cite this article:
डॉ. मनोज कुमार "बुंदेली कवि ‘ईसुरी’ के काव्य में लोक-जीवन के तत्त्व". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 31-36
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

