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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
उत्तर आधुनिक नव शैक्षणिक समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में और सिर्फ तितली
Authors
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M
Abstract

यह आलेख उत्तर आधुनिक नव शैक्षणिक समस्याओं को उपन्यास "और सिर्फ तितली" के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करता है। इस उपन्यास में बालकों की शिक्षा से जुड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक जटिलताओं को उजागर किया है। पारंपरिक शिक्षण पद्धति और गुरुकुल व्यवस्था की तुलना में आज की शिक्षा एक बाज़ारी वस्तु बन गई है, जहाँ स्कूलों को व्यवसायिक संस्थान के रूप में चलाया जा रहा है। उपन्यास में स्कूलों के व्यावसायीकरण, भ्रष्टाचार, असमानता, और शिक्षक विद्यार्थियों के शोषण को केंद्रीय विषय बनाया गया है। सरकारी स्कूलों के पतन और निजी स्कूलों के नाम पर हो रहे आर्थिक शोषण की सच्चाई को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है। शिक्षा में नैतिक मूल्यों के क्षय, अध्यापकों की सीमित भूमिका, वर्ग आधारित भेदभाव और पदोन्नति में भ्रष्ट आचरण भी इस व्यवस्था की विफलता को दर्शाते हैं।लेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उत्तर आधुनिक युग में शिक्षा अब व्यक्तित्व विकास या सामाजिक परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि स्वार्थ, सत्ता और पैसा कमाने का ज़रिया बन चुकी है। इस परिवेश में तितली एक रूपक के रूप में बार-बार सामने आती हैजो बालक की मासूमियत, स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता की प्रतीक है, लेकिन उसे शिक्षा व्यवस्था की कठोरता में कैद कर दिया गया है। इस प्रकार, यह लेख समकालीन शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकताओं को उजागर करते हुए हमें यह सोचने को मजबूर करता है कि क्या आज की शिक्षा प्रणाली वास्तव मेंविद्या का मंदिरहै या फिर केवल एकधंधा”?

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Pages:59-61
How to cite this article:
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M "उत्तर आधुनिक नव शैक्षणिक समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में और सिर्फ तितली". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 59-61
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