Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
रामचरितमानस में निहित जीवन-मूल्य और उनकी समकालीन प्रासंगिकता
Authors
सचिन गौतम, डॉ. शर्मिला
Abstract
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस भारतीय समाज, संस्कृति और आस्था का एक अमूल्य ग्रंथ है। यह न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक, नैतिक और पारिवारिक मूल्यों का एक जीवंत दस्तावेज भी है। तुलसीदास ने अपने समय की सामाजिक और धार्मिक विसंगतियों को समझते हुए इस ग्रंथ के माध्यम से लोकमंगल की भावना को केंद्र में रखा। वर्तमान समय में जब समाज अनेक प्रकार की समस्याओं जैसे नैतिक पतन, पारिवारिक विघटन, सामाजिक असहिष्णुता, और राजनीतिक भ्रष्टाचार से जूझ रहा है, रामचरितमानस अधिक प्रासंगिक हो उठता है।
रामचरितमानस में राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वे एक आदर्श पुत्र हैं जो पिता के वचन के लिए वनवास स्वीकार करते हैं, एकपत्नीव्रती पति हैं, आदर्श मित्र हैं और प्रजा के कल्याण हेतु समर्पित राजा भी हैं। राम के जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि मर्यादा और धर्म का पालन ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है। तुलसीदास ने धर्म को जीवन के हर क्षेत्र से जोड़ा है- कृमित्रता, पुत्र धर्म, भ्रातृ धर्म, राज धर्म, दाम्पत्य धर्म आदि।
तुलसी ने राम और सीता के माध्यम से पति-पत्नी संबंधों की मर्यादा और प्रेम को दर्शाया है। वे नारी के पतिव्रत धर्म के साथ-साथ पुरुष के पत्नीव्रत धर्म की भी बात करते हैं। राम का एकपत्नी व्रत और सीता का समर्पण भाव आज के समय में पारिवारिक मूल्यों के क्षरण को रोकने में मार्गदर्शक हो सकता है। रामराज्य की कल्पना तुलसीदास का एक महान सामाजिक-राजनीतिक योगदान है। रामराज्य में प्रजा सुखी है, धर्म की स्थापना है, दैहिक-दैविक-भौतिक तापों से मुक्ति है और सब एक-दूसरे के प्रति प्रेम भाव रखते हैं। यह आदर्श शासन व्यवस्था आज के लोकतंत्र के लिए प्रेरणा है। तुलसीदास ने उस समय की अराजक शासन व्यवस्था की आलोचना करते हुए रामराज्य के रूप में एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत किया।
तुलसीदास की एक अन्य विशेषता उनका समन्वयवादी दृष्टिकोण है। उन्होंने शैव और वैष्णव संप्रदायों के बीच एकता स्थापित करने का प्रयास किया। रामचरितमानस में शिव और राम के आपसी सम्मान का वर्णन करके उन्होंने धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया। यह समन्वय चेतना आज के धार्मिक विभाजन के समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। रामचरितमानस में निहित मूल्य जैसे- परोपकार, सहिष्णुता, कर्तव्यपरायणता, सत्य, प्रेम और समर्पण आज के समय में खोते जा रहे हैं। इस ग्रंथ के माध्यम से तुलसीदास ने एक ऐसे समाज की कल्पना की है जहाँ सबके कल्याण की भावना हो और जहाँ व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज के हित को भी महत्व दे।
रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशास्त्र है। आज जब समाज अनेक स्तरों पर विघटन और भ्रम का शिकार है, तब यह ग्रंथ हमें संयम, नैतिकता, और समरसता की प्रेरणा देकर एक आदर्श समाज के निर्माण की दिशा दिखाता है। इसकी प्रासंगिकता आज के समय में पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
Download
Pages:158-161
How to cite this article:
सचिन गौतम, डॉ. शर्मिला "रामचरितमानस में निहित जीवन-मूल्य और उनकी समकालीन प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 158-161
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.