Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
बघेली सोहर गीतों में सिया राम
Authors
करुणा सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा
Abstract
राम लोक नायक हैं अत: भारत की लगभग सभी जनपदीय तथा क्षेत्रीय भाषाओं में रामकथा के सूत्र अपनी-अपनी संस्कृति के आधार पर विकसित हुए हैं । इसीलिए भारत भूमि में प्रत्येक क्षेत्र का लोक साहित्य भगवान श्रीराम के उच्चतम आदर्शों और मूल्यों का संचित आख्यान है । राम सबके लोकमन में ऐसे रचे-बसे हुए हैं कि 'राम जी के चिरई, राम जी के खेत, खाइ लेऽ चिरई भरि-भरि पेट' जैसी कहावतें खेत-खलिहान, गली-मुहल्ले तक जन-जन में व्याप्त हैं । 
बघेली लोक जीवन का कोई प्रसंग, कोई संस्कार ऐसा नहीं है जिसमें राम-सीता की स्मृति न हो । इसीलिए बघेली लोक साहित्य के अन्तर्गत विपुल मात्रा में लोकगीतों तथा कथाओं के माध्यम से रामकथा के विविध प्रसंगों यथा- रामजन्म, विवाह, वनगमन, भरत मिलाप, लक्ष्मण मूर्छा, केवट प्रसंग, कौशल्या विरह, शबरी प्रसंग और अयोध्या काण्ड, लंका काण्ड आदि को उद्घाटित किया गया है । हजारों  वर्षों से भारतीय लोक संस्कृति में व्याप्त 'रामकथा' की यह परम्परा शास्त्रीयता से अलग जिस सहज, सुगम लोक साहित्य का वितान रचती है उसमें बघेली का लोक साहित्य अत्यंत उर्वर प्रकृति का है ।

Download
Pages:178-180
How to cite this article:
करुणा सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा "बघेली सोहर गीतों में सिया राम". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 178-180
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.