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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
सपनों की होम डिलीवरी’ उपन्यास में मीडिया का प्रभाव
Authors
रेष्मा पी
Abstract

दुनिया भर में प्रतिदिन अनेक जन्म, मृत्यु, मिलन और बिछुड़न की घटनाएँ होती रहती हैं, लेकिन सभी घटनाएँ सबका ध्यान आकर्षित नहीं करतीं। कुछ लोगों की खुशी सार्वजनिक खुशी बन जाती है और कुछ लोगों का दुःख सार्वजनिक दुःख। वहीं, किसी का दुःख किसी और की खुशी बन जाता है और किसी की खुशी किसी और के लिए दुःख का कारण बनती है।

मीडिया के आगमन के बाद अनेक लोगों का निजी जीवन सार्वजनिक हो गया है। विशेष रूप से सेलिब्रिटियों का— वे किसी भी क्षेत्र से जुड़े हों— मीडिया उनकी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर समाज के सामने प्रस्तुत करने में विशेष क्षमता रखती है। जो लोग कभी सामान्य थे और जिनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता था, वही जब प्रसिद्ध हो जाते हैं तो मीडिया उन्हें ऊपर उठाने और गिराने दोनों का प्रयास करता है। हमेशा उनके पीछे कैमरा लेकर चलते रहते हैं। कई बार इसका प्रभाव उनके निजी जीवन पर भी पड़ता है।

ऐसे ही मीडिया द्वारा चर्चित एक सेलिब्रिटी दंपति की कहानी पर आधारित ममता कालिया द्वारा लिखित एक लघु उपन्यास है “सपनों की होम डिलीवरी”। इस उपन्यास में आज के व्यस्त शहरी जीवन में सपनों को भी ऑर्डर करके दरवाज़े पर मिलती वस्तु की तरह देखने वाली उपभोक्तावादी मानसिकता पर व्यंग्य किया गया है। जहाँ रिश्तों का मूल्य कम होता जा रहा है और सपनों का भी बाजारीकरण हो रहा है।

इस परिस्थिति में घुटन महसूस करने वाली 'रुचि शर्मा' नामक सेलिब्रिटी, जो एक पाक कला विशेषज्ञ है, इस उपन्यास की मुख्य पात्र है। ममता कालिया ने इस कृति में नशे में फँसकर अपना जीवन बर्बाद करती युवा पीढ़ी का चित्रण भी किया है।
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Pages:50-52
How to cite this article:
रेष्मा पी "सपनों की होम डिलीवरी’ उपन्यास में मीडिया का प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 50-52
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