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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 1, ISSUE 1 (2015)
असमीया साहित्य के रोमान्टिक युग के कवि लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा और उनकी कविता : एक अध्ययन (रोमान्टिक भावधारा के विशेष सन्दर्भ में)
Authors
जयन्त कुमार बोरो
Abstract
‘लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा’ को असमीया साहित्य में एक रोमान्टिक कवि के रुप में स्मरण किया जाता है। असमीया साहित्य के ‘रोमान्टिक काव्य आन्दोलन’ एवं ‘जोनाकी युग’, के त्रिमूर्ति कवियों में लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा एक अन्यतम कवि है। बेजबरुवा जी का प्रथम काव्य संकलन ‘कदमकलि’ के नाम से सन् 1913 ई. में प्रकाशित’ हुआ। बाद में इधर- उधर की पत्रिकाओं में प्रकाशित कविताओं को संकलित कर ‘पदुमकलि’ के नाम से एक कविता संकलन तैयार किया गया। बेजबरुवा ने लगभग एक सो बीस तक की संख्याओं में कविताओं की रचना की है। बेजबरुवा की कविताओं में प्रेम- प्रीति, आध्यात्मिक भाव, जातीयता का भाव एवं व्यंग्य आदि विशेषताएँ देखने को मिलती है। इन विशेषताओं को केन्द्र में करके उनकी कविताओं को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है- 1. प्रेम- प्रीति पर आधारित कविता, 2. जातीयता भाव- बोध की कविता, 3. नीति एवं धर्म विषयक कविता, 4. व्यंग्य कविता आदि। इनमें से प्रथम दो विशेषताओं पर आधारित कविताओं के प्रणयन में उन्होंने अधिक सफलता प्राप्त की हैं। रोमान्टिस्जिम काव्य को असमीया साहित्य जगत में लाने का श्रेय लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा को विशेष रुप से जाता है। प्रस्तुत आलेख में उनकी कविताओं में अभिव्यक्त प्रेम- प्रीति और जातीयता भाव- बोध को विशेष रुप से उजागर एवं अध्ययन प्रस्तुत करने का प्रयास रहेगा।
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Pages:20-24
How to cite this article:
जयन्त कुमार बोरो "असमीया साहित्य के रोमान्टिक युग के कवि लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा और उनकी कविता : एक अध्ययन (रोमान्टिक भावधारा के विशेष सन्दर्भ में)". International Journal of Hindi Research, Vol 1, Issue 1, 2015, Pages 20-24
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