| S.No. | Title and Authors Name |
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| 1 | कृष्णा सोबती का विशिष्ट यात्रा साहित्य : बुद्ध का कमंडल लद्दाख़ Authors: दीप्ति डिगल, डॉ. स्नेहलता दास Pages:1-3 |
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| 6 | अकेली आवाज उपन्यास में अकेलापन का चित्रण : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन। Authors: डॉ. सांटी जोसफ Pages:14-17 |
| 7 | आदिवासी लोकगीत और खड़ीबोली लोकगीत का तुलनात्मक अध्ययन Authors: डॉ. झुनुबाला खुण्टिआ Pages:18-20 |
| 8 | हिंदी सिनेमा में हरियाणवी भाषा का स्वरूप Authors: भूपेंद्र, डॉ. शर्मिला Pages:21-23 |
| 9 | छायावादी काव्य में प्रकृति और प्रेम का स्वरूप Authors: राहुल, डॉ. कल्पना Pages:24-27 |
| 10 | प्रतिभा राय के ‘परिचय’ और ‘शिलापद्म उपन्यास में नारी यथार्थता Authors: अलकाराणी त्रिपाठी Pages:28-32 |
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| 12 | डिजिटल युग में लोक-साहित्य का संरक्षण और वैश्विक प्रसार Authors: श्याम मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी Pages:36-39 |
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| 14 | निर्मला: महिला सशक्तिकरण, समकालीन नारीवादी विमर्श एवं सामाजिक न्याय Authors: डॉ. सी. मोहना Pages:43-46 |
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| 16 | आषाढ़ का एक दिन की मल्लिकाः त्याग, विरह और आत्मसम्मान की त्रासदी Authors: डॉ0 सुरभि श्रीवास्तव Pages:52-54 |
| 17 | स्त्री-विमर्श सम्बन्धी चिंतन और हिंदी साहित्य Authors: दिपाली गंगवार Pages:55-58 |
| 18 | शोध-पत्र का शीर्षक: डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के उपन्यासों में राष्ट्रीय चेतना Authors: शुभांगी माथुरे Pages:59-60 |
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| 21 | कुंतला कुमारी साबत के हिन्दी काव्य में राष्ट्रीय चेतना और गांधीवादी दृष्टि Authors: डॉ. रूपधर गोमांगो Pages:70-73 |
| 22 | हिंदी भाषा: कल, आज और परसों — उद्भव, संघर्ष-यात्रा और एआई युग में वैश्विक धरातल Authors: ब्लेस्सनराजू Pages:74-76 |
| 23 | श्रीअयोध्या की बहु-सांस्कृतिक विरासत : अयोध्या की परंपराओं का एक ऐतिहासिक अनुशीलन Authors: सच्चिदानंद तिवारी , प्रकाश तिवारी Pages:77-81 |
| 24 | लल्ली और हब्बा की कश्मीरी कविताओं में प्रेम और आध्यात्मिकता Authors: बीरेन्द्र किस्कु Pages:82-84 |
| 25 | बंजारा समुदाय की सनातन संस्कृति और पौराणिक एवं ऐतिहासिकता अंतर्संबंध Authors: डॉ. ललित कुमार धारावत Pages:85-95 |
| 26 | बिहार के निचले न्यायालयों का एक क्षेत्रीय अध्ययन: जमीनी हकीकत, चुनौतियाँ और सुधार की दिशा Authors: राजीव कुमार, डॉ. संजय तिवारी Pages:96-98 |
| 27 | हिंदी और मराठी स्त्री आत्मकथाओं में पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती : रमणिका गुप्ता कृत 'हादसे' / 'आपहुदरी' और मलिका अमर शेख कृत 'मैं बरबाद होना चाहती हूँ' के विशेष संदर्भ में Authors: उषा रानी, डॉ. कल्पना Pages:99-101 |
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| 32 | हिन्दी पत्रिकाओं में अनुवाद विमर्श: एक आलोचनात्मक अध्ययन Authors: रुखसार आलम Pages:114-118 |
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| 34 | निर्मल वर्मा कि कहानियों में महानगरीय जीवन का तनाव Authors: अमित, डॉ. कल्पना शर्मा Pages:121-124 |
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| 36 | सांस्कृतिक चेतना और सामासिक संस्कृति : नज़ीर की कविता का आत्मीय पाठ Authors: डॉ. आलोक कुमार सिंह Pages:128-132 |
| 37 | उड़िया और हिंदी की प्रगतिवादी कविता का तुलनात्मक अध्ययन Authors: अमिय कुमार साहु Pages:133-137 |
| 38 | सुदामा पांडेय 'धूमिल' की कविता 'मोचीराम' और श्रम का सौंदर्यशास्त्र: एक विश्लेषण Authors: दुर्गेश पाण्डेय, डॉ. ज्ञानेन्द्र मणि त्रिपाठी Pages:138-141 |
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| 40 | डॉ. शरद सिंह की कहानियों में व्यक्त विद्रोही नारी जीवन Authors: डॉ. सुखदेव रामा पाटील Pages:144-146 |
| 41 | वृद्ध अस्मिता और हिंदी उपन्यास: ‘गिलिगडु’ और ‘रेहन पर रग्घू’ Authors: एस.वी.एस.एस. नारायण राजू Pages:147-151 |
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| 44 | डा० सूर्यपाल सिंह के नाट्य साहित्य में राष्ट्रीय चेतना Authors: डॉ प्रकाश चन्द्र गिरि, जगदीष यादव Pages:159-160 |
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| 47 | हरियाणा के समकालीन हिंदी साहित्य में युवा पीढ़ी की समस्याएँ Authors: पूनम, डॉ. रेणुका Pages:170-172 |
| 48 | हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा - एक आलोचनात्मक दृष्टि Authors: डॉ. जे सेन्दामरै Pages:173-175 |
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| 52 | सहजोबाई की ‘सोलह तिथियाँ’ में आध्यात्मिक चेतना और जीवन-दर्शन Authors: डॉ. रूपधर गोमांगो Pages:185-190 |
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