ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 1 (2017)
तुलसी साहित्य व राजनीतिक चिंतन
Authors
पिंकी शर्मा
Abstract
राजतंत्र के मध्य तुलसी ने रामराज्य नामक जिस राजनीतिक एवं सामाजिक वैचारिक का सूत्रपात किया उसकी प्राप्ति आज भी विश्व के सभी लोकतंत्रों का अंतिम लक्ष्य है। रामराज्य सुशासन, सुव्यवस्था, समाज एंव राष्ट्र के सर्वांगीण विकास, स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय, बंधुत्व और प्रजाहित में सतत संलग्न रहने का नाम है। इस व्यवस्था में सभी अपने को स्वस्थ, सुखी, प्रसन्न, विकासशील, समृद्ध और सवतंत्र अनुभूत करते हुए स्वकत्र्तव्यपालन में निमग्न रहते हैं। कोई किसी की उन्नति और प्रसन्नता में बाधक नहीं बनता है। तुलसी का रामराज्य कहने भर को राजतंत्र था। वह अन्य राजतंत्रों के सदृश निरंकुश, स्वेच्छाधारी एंव अमर्यादित न होकर लोकोन्मुख, लोकशील एंव जनवादी था। इस तंत्र में राजा का मनोनयन तक न केवल जन भावनाओं के अनुरूप था, अपितु लोक द्वारा समर्थित भी था। श्रीराम को युवराज बनाने का विचार दशरथ से भी पहले जन सामान्य के मन में स्फुरित होता है,
Download
Pages:74-77
How to cite this article:
पिंकी शर्मा "तुलसी साहित्य व राजनीतिक चिंतन". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 1, 2017, Pages 74-77
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

