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VOL. 3, ISSUE 2 (2017)
मृदुला गर्ग के उपन्यास कठगुलाब में नारी संवेदना
Authors
डॉ0 सुमन सामोता
Abstract
मेरे शोध पत्र का उद्देश्य मृदुला गर्ग के उपन्यास 'कठगुलाब' में नारी संवेदना को अभिव्यक्त करना है। मृदुला गर्ग बेहद संकोची व अन्तर्मुखी व्यक्तित्व की लेखिका है। उनका उपन्यास कठगुलाब नारी संवेदना की सशक्त औपन्यासिक कृति है, जहां नारी पर घटित अन्याय, अत्याचार एवं उसकी वेदना के साथ नर-नारी सम्बन्धों की जटिल बुनावट और उसके रेशे-रेशे को व्याख्यायित करने की छटपटाहट का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है।
‘कठगुलाब’ का प्रतीकात्मक अर्थ है ‘‘नारी की जिजीविषा।’’ उन्होंने माा है कि स्त्रियाँ गुलाब नहीं हैं जो उग जाने पर अपने आप खिल भी जाता है वे कठगुलाब हैं जिन्हें थोड़ी-सी देखभाल के साथ खिलाना भी पड़ता है।
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Pages:09-12
How to cite this article:
डॉ0 सुमन सामोता "मृदुला गर्ग के उपन्यास कठगुलाब में नारी संवेदना". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 2, 2017, Pages 09-12
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