International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 3, Issue 3 (2017)

प्रसाद और राकेश: इतिहास दृष्टि के संदर्भ में


विकास वर्मा

हिन्दी नाटक और रंगमंच के इतिहास में जयशंकर प्रसाद और मोहन राकेश का विशिष्ट स्थान है। प्रसाद के नाटकों का पूरा परिवेश स्वाधीनता की चेतना से संपृक्त है। उनके लिए इतिहास का अन्वेषण सांस्कृतिक व्यक्तित्व से जुड़ी चीज़ है जिसे आज हम जड़ों की तलाश और सांस्कृतिक प्रश्न के रूप में प्रायः चर्चा का विषय बनाते हैं। वहीं, दूसरी ओर, मोहन राकेश के नाटक युग परिवेश की बदलती हुई दृष्टि का साक्षात्कार करते हैं जिसके पीछे एक सृजनात्मक खोज की प्रेरणा है जो बदलते हुए मानव-सम्बंधों और मानव-मूल्यों को केन्द्र में लाने से निर्मित होती है। दोनों नाटककारों की इतिहास दृष्टि को इसी परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है।
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विकास वर्मा. प्रसाद और राकेश: इतिहास दृष्टि के संदर्भ में. International Journal of Hindi Research, Volume 3, Issue 3, 2017, Pages 30-32
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