ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 5 (2017)
जय शंकर प्रसाद के काव्य कामायनी में नारी सौदर्य
Authors
डॉ. रीता शुक्ला
Abstract
कामायनी
छायावाद की चरम परिणति है और जयशंकर प्रसाद के गंभीर चिंतना का श्रेष्ठतम प्रतिफल
भी है। पन्द्रह सर्गों में विभक्त यह काव्य श्रद्धा और मनु के माध्यम
से सृष्टि के विकास की कथा को तो प्रस्तुत करता ही है श्लिष्ट रूपक-विधान के सहारे मानवता के चरम विकास को भी मनोवैज्ञानिक और
आध्यात्मिक भूमिका पर प्रस्तुत करता है। बीसवीं शताब्दी
की महनीय उपलब्धि के रूप में कामायनी दार्शनिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक और कलात्मक वैशिष्ट्य का समीकृत रूप लेकर आई है। 'चिन्ता से 'आनन्द' की चरम परिणति तक की
यात्रा करता हुआ यह काव्य हिमगिरि की एक चेतनता से समरस होने वाले मनु
के जीवन का इतिहास है। मानवीय चेतना के अन्नमय कोष से आनंदमय शिखर तक पहुँचने की यात्रा का वृत्तान्त है। इसके प्रमुख
पात्र मनु,श्रद्धा और इड़ा है, जो इच्छा, क्रिया और ज्ञान के
प्रतिनिधि हैं।
Download
Pages:96-99
How to cite this article:
डॉ. रीता शुक्ला "जय शंकर प्रसाद के काव्य कामायनी में नारी सौदर्य". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 5, 2017, Pages 96-99
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

