International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 4, Issue 1 (2018)

ओमप्रकाश वाल्मिकी के साहित्य का समाज में योगदान


माया माहेश्वरी

एक निश्चित भू भाग में रहने वाले जनसमूह को समाज कहा जाता है। जिसकी अपनी परम्पराएं, रीति रिवाज एवं संस्कृति होती है। 'साहित्य समाज का दर्पण है'। साहित्य भाव व विचार की अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है बल्कि वह रचयिता की समग्र जीवन दृष्टि का प्रतिफलन है। दलित वह है जिनकों हमारी सामाजिक व्यवस्थाओं में वर्षों से निम्न स्थान प्राप्त है, जो उपेक्षित है, जिन्हें अभी तक समाज में कोई स्थान प्राप्त नहीं है। वे दलित है जिनके मूल में उत्पीड़न, दासता और सामाजिक बहिष्कार ही प्रमुख है। दलित साहित्य में दलितों के बारे में काफी कुछ लिखा गया है, परन्तु ओमप्रकाश वाल्मिकी के साहित्य में दलित जीवन की पीड़ा, तिरस्कार, शोषण इत्यादि का वास्तविक रुप से वर्णन किया गया है। ओमप्रकाश वाल्मिकी ने अपने साहित्य के द्वारा दलितों के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रुप का जो चित्रण किया है, वो किसी और दलित साहित्य में नहीं मिलता। परिवर्तन प्रकृति का नियम है जब व्यक्तियों की मानसिकता परिवर्तित होती है तो हमें समाज में परिवर्तन दिखाई देता है। समाज में होने वाले सभी तरह के परिवर्तनों को सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है।
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माया माहेश्वरी. ओमप्रकाश वाल्मिकी के साहित्य का समाज में योगदान. International Journal of Hindi Research, Volume 4, Issue 1, 2018, Pages 39-42
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