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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 4, ISSUE 6 (2018)
राजनीतिक मूल्यों का विघटन और समकालीन हिन्दी कहानी
Authors
डॉ. विष्णु तंकप्पन
Abstract
लोकतांत्रिक व्यवस्था के वास्तविक कर्णाधर देश के राजनीतिक नेतागण ही होते हैं। भारतीय लोकतंत्र के सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जनता द्वारा चुने गये राजनीतिक नेता ही कार्यरत है। देश और जनता की प्रगति एवं कल्याण के लिए नीतियों और योजनाओं का निर्माण करना इनका दायित्व है। इसके लिए इन्हें निजी स्वार्थों से परे होकर कार्य करना जरूरी है। लेकिन दुर्भाग्यवश भारतीय राजनीति आज व्यक्ति केन्द्रित हो गयी है। सत्ता से प्राप्त होनेवाली सुख सुविधाओं ने वर्तमान राजनीति को भ्रष्ट कर दिया है। राजनीति आज एक धंधा बन गयी है। फलस्वरूप आम जनता का लोकतंत्र व्यवस्था से विश्वास खोता जा रहा है। भारतीय राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार,धर्म एवं जातिवाद का प्रभाव,परिवारवाद,भाई भतीजावाद आदि का चित्रण विभिन्न लेखकों ने अपनी कहानियों में किया है। इन मुद्दों पर प्रकाश डालने की कोशिश प्रस्तुत लेख में की गई है।
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Pages:01-04
How to cite this article:
डॉ. विष्णु तंकप्पन "राजनीतिक मूल्यों का विघटन और समकालीन हिन्दी कहानी". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 6, 2018, Pages 01-04
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