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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 5, ISSUE 1 (2019)
हठयोग साधना का आधारभूत ग्रंथ गोरक्षशतक विभिन्न विद्वानों के मतों की समीक्षा : एक अध्ययन
Authors
उमाषंकर कौशिक, नीलू विश्वकर्मा, अखिलेश कुमार विश्वकर्मा, डाॅ0 उपेन्द्र बाबू खत्री
Abstract
हठयोग साधना एक महत्वपूर्ण यौगिक साधना है। जिसमें हठ शब्द, दो शब्दों से मिलकर बना है। वह हैं- ह + ठ अर्थात हठ। नाथ योगियों ने हठ का अर्थ शरीर में स्थित शक्ति की दो विपरीत धाराओं से लिया है, जो सामान्य अवस्था में एक दूसरे के विपरीत कार्य कर साधकों की मुक्ति में बाधक होते हैं। इन्हीं शक्ति की दो धाराओं को विभिन्न यौगिक अभ्यासों आसन, प्राणायाम, यौगिक आहार, मुद्रा, बंध, धारणा, ध्यान, समाधि आदि से सुप्त आंतरिक शक्ति (कुण्डलिनी) को जागृत करना ही हठयोग साधना का परम लक्ष्य है। गोरक्षशतक हठयोग साधना का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। जिसके रचनाकार प्रसिद्ध नाथ योगी गोरक्षनाथ (गोरखनाथ) को माना जाता है। जिसमें सौ श्लोकों में गोरक्षनाथ के छः योगांगों आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि की चर्चा है। उपरोक्त ग्रंथ गोरक्षशतक पर विभिन्न विद्वानों में जी. डब्ल्यू ब्रिग्स, हजारी प्रसाद द्विवेदी, नागेन्द्रनाथ उपाध्याय, रामलाल श्रीवास्तव आदि विद्वानों ने गोरक्षपद्धति के प्रथम सौ श्लोकों को गोरक्षशतक माना है। जबकि वैज्ञानिक रीति से कार्य कर पैतीस हस्तलिपियों के साथ कैवल्यधाम, श्रीमनमाधव योगमंदिर समिति, लोनावला, पुणे ने गोरक्षशतक का प्रकाशन किया है। जिनका आधार सौ श्लोकों में गोरक्षशतक के छः योगांगों का समावेश प्राप्त होता है वे हस्तलिपियाँ हैं ‘इन्डिया आफिस लाइबे्ररी, लंदन व अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्, लखनऊ की जिससे यह ज्ञात होता है कि गोरक्षपद्धति गोरक्षशतक का ही विस्तार रूप है। जो कालांतर में इन सौ श्लोकों में विस्तार के कारण दो सौ श्लोकों का एक ग्रंथ बन गया जिसमें गोरक्ष शतक के उपरोक्त विषय बिखरे हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि गोरक्षशतक गोरक्षपद्धति के प्रथम सौ श्लोक नही है वरन गोरक्षशतक का विस्तार रूप गोरक्षपद्धति है।
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Pages:17-19
How to cite this article:
उमाषंकर कौशिक, नीलू विश्वकर्मा, अखिलेश कुमार विश्वकर्मा, डाॅ0 उपेन्द्र बाबू खत्री "हठयोग साधना का आधारभूत ग्रंथ गोरक्षशतक विभिन्न विद्वानों के मतों की समीक्षा : एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 1, 2019, Pages 17-19
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