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VOL. 5, ISSUE 1 (2019)
कथक नृत्य का रायगढ़ दरबार, शैली या घराना : एक समीक्षा
Authors
यास्मीन सिंह
Abstract
प्रायः कलाओं में भावनाओं और संवेदनाओं का महत्व रहा है। संभव है, कि कहीं-न-कहीं भावनाओं के आधार पर बातें कहीं जाती है, तो कहीं संवेदनाओं के आधार पर निष्कर्ष तक पहुँचा जाता है। किन्तु किसी भी विषय का अन्वेषण में भावनाओं और संवेदनाओं का स्थान प्रायः नहीं होता, वह मुख्य रूप से तथ्यों पर आधारित होना चाहिए। कथक नृत्य में किसी व्यक्ति विशेष द्वारा प्रवर्तित या पल्लवित पद्धति या तकनीक या शैली, जिसे उस व्यक्ति ने अपनी पीढ़ी को हस्तांतरित किया हो, जो निर्बाध रूप से उस व्यक्ति के साथ-साथ तीन पीढ़ीयों तक निर्बाध रूप से गतिशील रही हो, तो घराने के रूप में ग्रहण किया जाता सकता है।
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Pages:27-29
How to cite this article:
यास्मीन सिंह "कथक नृत्य का रायगढ़ दरबार, शैली या घराना : एक समीक्षा". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 1, 2019, Pages 27-29
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