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VOL. 5, ISSUE 2 (2019)
महाकवि गुलाब खण्डेलवाल के काव्य-दर्पण में जीवन मूल्य का प्रतिबिम्ब
Authors
मोनिका
Abstract
साहित्यकार अपने युग का प्रतिनिधि होता है। वह अपने युग की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। अतः उसकी कृतियों में युगीन परिस्थितियों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। काव्य में जीवन के विभिन्न प्रतिमानों की सार्थकता सभी युग में बनी रही है। इस सार्थकता को बनाए रखने के लिए सबसे बड़ा योगदान साहित्यकारों का रहा है। उन साहित्यकारों में एक नाम महाकवि गुलाब खंडेलवाल का है जिन्होंने भक्ति, प्रेम, अध्यात्म के अतिरिक्त मानवीय मूल्यों और मानवता के उत्कर्ष को केंद्र में रखकर अपने साहित्य का सृजन किया। जो वर्तमान समय की समस्याओं हल करने में सक्षम ही नहीं बल्कि नई दिशा प्रदान करने वाला दृष्टिगोचर होता है। खण्डेलवाल सांस्कृतिक नवजागरण व सांस्कृतिक पुनरुत्थान के कवि है, पर वह अतीत की ओर लौटने वाले कवि नहीं, बल्कि अतीत को वर्तमान से जोड़ कर भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाले कवि थे। अंतः युगीन अर्थवत्ता में खण्डेलवाल सदा-सदा के लिए प्रासंगिक बने रहेगे।
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Pages:30-32
How to cite this article:
मोनिका "महाकवि गुलाब खण्डेलवाल के काव्य-दर्पण में जीवन मूल्य का प्रतिबिम्ब". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 2, 2019, Pages 30-32
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