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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 1 (2020)
हिन्दी नाटकों में स्त्री चेतना
Authors
नेहा शर्मा
Abstract
हिन्दी नाट्य साहित्य विभिन्नताओं का युग है । यह युग सिर्फ पुरुष जाति के उत्थान का युग नहीं अपितु स्त्री के उत्थान एवं प्रगति और साहस को दर्शाता है । आज विकास का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जो स्त्री से अछूता हो । न सिर्फ भारत में अपितु विश्व में स्त्रियों ने अपनी विजय पताका फहरायी है परंतु इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो पुरुष ने स्त्री के साथ कभी भी न्याय नहीं किया । पुरुष के उत्पीड़न और अन्याय से विश्व साहित्य भरा पड़ा है । समय के साथ स्त्रियों ने शिक्षा प्राप्त करते हुए स्वयं को चेतना सम्पन्न किया साथ ही अपने बराबरी के अधिकार के लिए संघर्ष करती हैं । जिसकी झलक साहित्य कि अन्य विधाओं के साथ ही हिन्दी नाटकों में भी दिखता है । आज जरूरत इस बात की है कि स्त्री को समाज में समान अधिकार मिले तभी नारी जाति गर्व से अपना मस्तक ऊंचा कर पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर समाज की उन्नति में अपनी भूमिका अदा कर सकेगी
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Pages:87-89
How to cite this article:
नेहा शर्मा "हिन्दी नाटकों में स्त्री चेतना<em></em>". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 1, 2020, Pages 87-89
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